आर्म लाइसेंस कैसे बनवाएं? असली फीस कितनी होती है और पूरी प्रोसेस क्या है जानिए - The Allah

आर्म लाइसेंस कैसे बनवाएं? असली फीस कितनी होती है और पूरी प्रोसेस क्या है जानिए

किसी भी प्रकार का असला हा रिवाल्वर पिस्टल माउजर आदि खरीदना उतना मुश्किल नहीं है परंतु कानूनी तौर पर यह हथियार रखने के लिए आर्म लाइसेंस बनवाना काफी मुश्किल है. भारत सरकार ने 2016 में आर्म लाइसेंस संशोधन के बाद लगभग हर व्यक्ति के लिए इसे सुविधाजनक बना दिया है परंतु फिर भी हर कोई व्यक्ति यह लाइसेंस नहीं बनवा सकता और इसके पीछे की बड़ी वजह यह होती है कि लोगों को लाइसेंस बनवाने की सही जानकारी नहीं होती वह भटकते रह जाते हैं और अपने पैसे बर्बाद कर बैठते हैं पर लाइसेंस नहीं बना पाते. साथ ही इस लेख में हम आपको बताएंगे आर्म लाइसेंस आसानी से किस प्रकार बनाएं?

आर्म लाइसेंस बंदूक रिवाल्वर पिस्टल रखने का लाइसेंस कैसे और किसे मिलता है?

आर्म लाइसेंस कैसे बनवाएं इससे पहले यह जानना जरूरी है यह लाइसेंस कैसे मिलता है? और कौन-कौन व्यक्ति लाइसेंस के लिए आवेदन कर सकते हैं. आपको जानकारी जरूर होगी कि ड्राइविंग लाइसेंस बनवाना भी कोई आसान काम नहीं है यहां तो बात गन लाइसेंस की है तो यह भी और ज्यादा कठिन होगा.

कानून के अनुसार गन लाइसेंस रखने के लिए आपके पास ठोस वजह होनी चाहिए, जैसे कि आपकी संपत्ति की सुरक्षा के लिए, आत्मरक्षा के लिए अथवा आपकी हैसियत इतनी है कि आपको कभी भी बंदूक इस्तेमाल करने की जरूरत पड़ सकती है. यह तीन मुख्य कारण आर्म लाइसेंस बनवाने में उपयोग होते हैं.

यदि आप सिर्फ शौक पूरे करने के लिए अपने पास कोई रिवाल्वर या पिस्टल खरीदना चाहते हैं तो आपको हैसियत सिद्ध करने की जरूरत पड़ती है और इसके लिए हैसियत प्रमाण पत्र बनता है.

आपके ऊपर जानलेवा हमला हुआ है इसलिए अपनी आत्मरक्षा के लिए लाइसेंस के लिए आवेदन करना चाहते हैं तो आपको आपके ऊपर भूतकाल में हुए हमलों के मुकदमे की प्रतियां लाइसेंस के लिए आवेदन करते समय प्रस्तुत करनी होती है, जिनके आधार पर जिला न्यायाधीश फैसला लेते हुए आपके लाइसेंस आवेदन को मंजूरी देते हैं.

यदि आप कई सारे खेतों के मालिक हैं जिनमें ऐसी फसल होती है जिसे जंगली सूअर जैसे खतरनाक जानवरों से खतरा है, ऐसी स्थिति में भी आप अपने खेतों की रक्षा के लिए आर्म लाइसेंस का आवेदन डाल सकते हैं इस स्थिति में आपको वैसे ही बंदूक खरीदने का लाइसेंस दिया जाएगा, आप पिस्टल रिवाल्वर या माउजर नहीं खरीद सकते.

आर्म लाइसेंस बंदूक का लाइसेंस कैसे बनता है?

भारत सरकार का गृह मंत्रालय आर्म लाइसेंस को मंजूरी देता है फिर चाहे वह केंद्रीय गृह मंत्रालय हो या फिर आपके राज्य का गृह मंत्रालय. गृह मंत्रालय तक आपके द्वारा हथियार रखने के लाइसेंस बनवाने का अनुरोध आपके डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट के द्वारा भेजा जाता है.

आर्म लाइसेंस की प्रक्रिया सबसे पहले आपके जिला न्यायालय से ही शुरू होती है, आवेदन करता लाइसेंस का फॉर्म भरकर उसे दो प्रतियों में अपने दस्तावेजों की फोटो कॉपी सम्मिलित फाइल तैयार करके जिला न्यायालय में बने शस्त्र अनुभाग के बाबू को दोनों फाइल जमा कर देता है. इसके बाद शुरू हो जाती है आवेदन की जांच की प्रक्रिया. अब आपको बताते हैं कि जब आप आवेदन करेंगे तब आपका आर्म लाइसेंस किस प्रक्रिया से बनेगा.

आर्म लाइसेंस के लिए ऑनलाइन अथवा ऑफलाइन आवेदन करने की प्रक्रिया

भारत सरकार द्वारा आर्म लाइसेंस के आवेदन हेतु ऑनलाइन वेब पोर्टल भी बना दिया गया है, अब आप ऑनलाइन भी आवेदन कर सकते हैं. आवेदन चाहे ऑफलाइन किया जाए अथवा ऑनलाइन आगे की प्रक्रिया एक जैसी ही रहती है. परंतु ऑनलाइन किए गए आवेदन कुछ ज्यादा ही कारगर रहते हैं. और इसमें भागदौड़ कम होती है.

परंतु यदि आप ऑफलाइन आवेदन करना चाहते हैं तो आपको जिला न्यायालय जाकर वहां पर नए लाइसेंस हेतु आर्म लाइसेंस का फॉर्म a1 खरीदना होगा जिसकी कीमत करीब ₹200 होती है. वही ऑनलाइन आवेदन करने पर कोई भी फीस नहीं पड़ती. ऑनलाइन आवेदन आप किसी भी इंटरनेट के जानकार व्यक्ति से करवा सकते हैं या स्वयं भी कर सकते हैं.

आवेदन करने के लिए पहले आप भारत सरकार की एन डी ए एल साइट पर जाकर के अप्लाई ऑनलाइन पर क्लिक करें और अपना राज्य तथा जिला चुनकर आगे का फॉर्म भरे. फॉर्म भरने पर आपका एक रिफरेंस नंबर जनरेट हो जाता है, रेफरेंस नंबर से आप अपने किए गए आवेदन की स्थिति जान सकते हैं.

ऑनलाइन आवेदन करने के बाद आवेदन फॉर्म का प्रिंट आउट निकाल लीजिए और इसकी तीन प्रतियां बनाएं. 3 प्रतियों को तीन अलग-अलग रिकॉर्ड फाइल में लगा लीजिए. और इसी फाइल में आपको अपने कुछ महत्वपूर्ण डॉक्यूमेंट शामिल करने होंगे.

  1. आपका जन्म प्रमाण पत्र
  2. आपका स्वास्थ्य प्रमाण पत्र
  3. आपका आधार कार्ड
  4. वोटर आईडी कार्ड
  5. आपके दो पड़ोसियों का आधार कार्ड वह आपके पक्ष में दिया गया उनका हलफनामा
  6. हाई स्कूल इंटर की मार्कशीट की फोटो कॉपी

ऊपर बताया गया सभी डाक्यूमेंट्स की 3 प्रतियां फोटो कॉपी करा कर के तीनों फाइल में लगा लीजिए. और उन्हें अपने जिला के डीएम ऑफिस में ले जाइए जहां पर बने हुए शस्त्र अनुभाग में आपको यह तीनों फाइल जमा करनी है. आमतौर पर शुक्रवार के दिन यह फाइलें जमा होती हैं, पहले जमा करने से पहले इनमें से लगवाना ना भूले इसकी जानकारी आपको सत्र अनुभाग में ही दे दी जाएगी.

जब आप असलाहा बाबू के पास अपनी फाइलें जमा कर देते हैं वह एक फाइल एसडीएम के पास भेजता है और दूसरी फाइल कमिश्नर के पास तथा तीसरी फाइल अपने पास सुरक्षित रखता है. एसडीएम के पास पहुंची फाइल आपके तहसील में आती है जहां से तहसीलदार आपके क्षेत्र के संबंधित लेखपाल को वह फाइल देता है और आपका लेखपाल आपकी हैसियत का मुआयना करके रिपोर्ट तैयार करके फाइल में सम्मिलित करके उसे वापस डीएम ऑफिस के शस्त्र अनुभाग में भेज देता है, भ्रष्टाचार के चलते तहसील से तैयार होने वाली इस रिपोर्ट को आपके पक्ष में करने की एवज में आपसे पैसे की डिमांड भी होती है, वरना सब कुछ सही होने के बाद भी तहसील से खराब रिपोर्ट ही भेजी जाती है.

दूसरी फाइल जो कमिश्नर के पास आई होती है कमिश्नर के द्वारा उसे आपके नजदीकी थाने में भेजा जाता है जहां से कुछ पुलिस वाले नियुक्त किए जाते हैं जो आपकी जांच करते हैं तथा आपके चरित्र और आपके निवास की जांच करके यह रिपोर्ट तैयार करते हैं कि आप और आपका निवास हथियार रखने के काबिल है. यहां भी पैसे का थोड़ा खेल हो जाए तो काम जल्दी हो जाता है. वरना गड़बड़ हो जाता है.

उतना मुश्किल नहीं होता जितना मुश्किल तब होता है जब आप की फाइल डीएम के पास पहुंचती है, भले ही सारी रिपोर्ट आप के पक्ष में हो परंतु डीएम फिर भी लाइसेंस का आवेदन स्वीकार नहीं करता. और यदि करता भी है तो जबरन आपके द्वारा रेड क्रॉस सोसाइटी में 50000 या फिर 80000 का डोनेशन देने की रसीद भर देता है अब आपको लाइसेंस लेने के लिए यह डोनेशन देना जरूरी पड़ जाता है. कानूनी रूप से डीएमके द्वारा की जाने वाली हरकत पूरी तरह से गैरकानूनी है डोनेशन देना व्यक्ति की मर्जी पर होता है और आमतौर पर ₹500 डोनेशन में दिए जाते हैं.

इस प्रक्रिया से गुजरने के बाद ही आप का लाइसेंस बनता है, यदि आप लाइसेंस बनवाना चाहते हैं तो जेब मजबूत रखें.


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