जानिए : कुरान की कौन सी 26 आयतों पर पाबन्दी लगवाना चाहते हैं काफ़िर - The Allah

जानिए : कुरान की कौन सी 26 आयतों पर पाबन्दी लगवाना चाहते हैं काफ़िर

 वसीम रिजवी ने भारतीय सुप्रीम कोर्ट में कुरान के अंदर से 26 आयतों को निकाल देने की मांग की है. इसके लिए उसने बकायदा जनहित याचिका दायर की है, बड़े-बड़े वकीलों की जमात उसके साथ लगी है जो कोर्ट में यह साबित करेगी कि यह कुरान की आयतें भारत के लोगों यानी मुसलमान और गैर मुसलमान के बीच में लड़ाई झगड़े कराती हैं. या फिर मुसलमानों को यह सिखाती है कि वह चुपके चुपके गैर मुसलमानों के खात्मे की तैयारी करते रहें.

वसीम रिजवी ने कौन से 26 आयतों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका डाली ?

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यहां नीचे हम आपको 24 आयतों की लिस्ट दे रहे, हमें अभी तक यह लिस्ट प्राप्त हो सकती है. गौर से पढ़िए इनको अपने मन में तय कीजिए कि वाकई में यह किसी के खिलाफ है.  

1- ''फिर, जब पवित्र महीने (रमजान का महीना) बीत जाऐं, तो 'मुश्रिको' (मूर्तिपूजको ) को जहाँ-कहीं पाओ कत्ल करो, और पकड़ो और उन्हें घेरो और हर घातकी जगह उनकी ताक में बैठो। - (कुरान 9:5 

2- ''हे 'ईमान' लाने वालो (केवल एक आल्ला को मानने वालो ) 'मुश्रिक' (मूर्तिपूजक) नापाक (अपवित्र) हैं।'' - (कुरान 9:28) 

3- ''निःसंदेह 'काफिर (गैर-मुस्लिम)तुम्हारे खुले दुश्मन हैं।'' - (कुरान 4:101).  

4- ''हे 'ईमान' लाने वालों! (मुसलमानों) उन'काफिरों' (गैर-मुस्लिमो) से लड़ो जो तुम्हारे आस पास हैं, और चाहिए कि वे तुम में सखती पायें।'' - (कुरान 9:123) 

5- ''जिन लोगों ने हमारी ''आयतों'' का इन्कार किया (इस्लाम व कुरान को मानने से इंकार) , उन्हें हम जल्द अग्नि में झोंक देंगे। जब उनकी खालें पक जाएंगी तो हम उन्हें दूसरी खालों से बदल देंगे ताकि वे यातना का रसास्वादन कर लें। निःसन्देह अल्लाह प्रभुत्वशाली तत्वदर्शी हैं'' - (कुरान 4:56). 

6- ''हे 'ईमान' लाने वालों! (मुसलमानों) अपने बापों और भाईयों को अपना मित्रमत बनाओ यदि वे ईमान की अपेक्षा 'कुफ्र' (इस्लाम को धोखा) को पसन्द करें। और तुम में से जो कोई उनसे मित्रता का नाता जोड़ेगा, तो ऐसे ही लोग जालिम होंगे'' - (कुरान 9:23) 

7- ''अल्लाह 'काफिर' लोगों (गैर-मुस्लिमो ) को मार्ग नहीं दिखाता'' - (कुरान9:37) 

8- '' ऐ ईमान (अल्ला पर यकिन) लानेवालो! तुमसे पहले जिनको किताब दी गई थी, जिन्होंने तुम्हारे मजहब को हँसी-खेल बना लिया है, उन्हें और इनकार करनेवालों को अपना मित्र न बनाओ। और अल्लाह का डर रखों यदि तुम ईमानवाले हो -  (कुरान 5:57) 

9- ''फिटकारे हुए, (मुनाफिक) मूर्तिपूजक जहां कही पाए जाऐंगे पकड़े जाएंगे और बुरी तरह कत्ल किए जाएंगे।''  (कुरान 33:61) 

10- ''(कहा जाऐगा): निश्चय ही तुम और वह जिसे तुम अल्लाह के सिवा (दूसरे भगवान को मानना) पूजते थे'जहन्नम' का ईधन हो। तुम अवश्य उसके घाट उतरोगे।'' - कुरान 21:98 

11- 'और उस से बढ़कर जालिम कौन होगा जिसे उसके 'रब' की आयतों के द्वारा चेताया जाये और फिर वह उनसे मुँह फेरले (इस्लाम छोड दे) निश्चय ही हमें ऐसे अपराधियों से बदला लेना है।'' - (कुरान 32:22) 

12- 'अल्लाह ने तुमसे बहुत सी 'गनीमतों' (लूट का माल ) में हिस्सा देने का वादा किया है जो तुम्हारे हाथ आयेंगी,'' - (कुरान 48:20) 

13- ''तो जो कुछ गनीमत (लूट का माल और औरते) तुमने हासिल किया है उसे हलाल (valid) व पाक समझकर इस्तेमाल करो  ' - (कुरान 8:69) 

14- ''हे नबी! 'काफिरों' और 'मुनाफिकों' के साथ जिहाद करो (आतंकवादी बनकर गैर-मुस्लिमो का कत्ल) और उन पर सखती करो और उनका ठिकाना 'जहन्नम' है, और बुरी जगह है जहाँ पहुँचे'' -  (कुरान 66:9) 

15- 'तो अवश्य हम 'कुफ्र' (इस्लाम को धोखा देने वालो) करने वालों को यातना का मजा चखायेंगे, और अवश्य ही हम उन्हें सबसे बुरा बदला देंगे उस कर्म का जो वे करते थे।'' - (कुरान41:27) 

16- ''यह बदला है अल्लाह के शत्रुओं का('जहन्नम' की) आग (गैर-मुस्लिमो को नर्क )। इसी में उनका सदा का घर है, इसके बदले में कि हमारी'आयतों' का इन्कार(इस्लाम व कुरान को नही अपनाना) करते थे।'' - (कुरान 41:28) 

17- ''निःसंदेह अल्लाह ने'ईमानवालों' (मुसलमानों) से उनके प्राणों और उनके मालों को इसके बदले में खरीद लिया है कि उनके लिए 'जन्नत' हैः वेअल्लाह के मार्ग में लड़ते हैं तो मारते भी हैं (इस्लाम फैलाने के लिये आतंकवादी बन कर गैर-मुस्लिमो को मारना व जबरन इस्लाम कबूलवाना) और मारे भी जाते हैं।'' - (कुरान 9:111). 

18- ''अल्लाह ने इन 'मुनाफिक' पुरुषों और मुनाफिक स्त्रियों और काफिरों से 'जहन्नम' की आग का वादा किया है जिसमें वे सदा रहेंगे। यही उन्हें बस है।अल्लाह ने उन्हें लानत की और उनके लिए स्थायी यातना है। (गैर-मुस्लिम सदा नर्क मे रहेगे )'' - (कुरान 9:68) 

19- ''हे नबी! 'ईमानवालों' (मुसलमानों) कोलड़ाई पर उभारो। यदि तुम में बीस जमेरहने वाले होंगे तो वे दो सौ पर प्रभुत्वप्राप्त करेंगे, और यदि तुम में सौ हो तो एक हजार काफिरों (गैर-मुसलमानो) पर भारी रहेंगे' - (कुरान 8:65) 

20- ''हे 'ईमान' लाने वालों! तुम यहूदियों और ईसाईयों को मित्र संबंध न बनाओ। - (कुरान 5:51).  

21- उनसे लड़ो यहाँ तक कि वे जलील होकर अपने हाथों से 'जजिया' देने लगे।'' (गैर-मुसलिमो पर जजिया tax) - (कुरान 9:29) 

22-फिर हमने उनके बीच कियामत के दिनतक के लिये वैमनस्य और द्वेष की आग भड़का दी, और अल्लाह जल्द उन्हें बतादेगा जो कुछ वे करते रहे हैं। - (कुरान 5:14) 

23- ''वे चाहते हैं कि जिस तरह से वे काफिर (गैर-मुस्लिम) हुए हैं उसी तरह से तुम भी 'काफिर' हो जाओ, फिर तुम एक जैसे हो जाओः इसीलिए उनमें से किसी को अपना साथी न बनाना जब तक वे अल्लाह की राह में हिजरत न करें, और यदि वे इससे फिर जावें तो उन्हें जहाँ कहीं पाओं पकड़ों और उनका कत्ल करो।और उनमें से किसी को साथी और सहायक मत बनाना।'' - (कुरान 4:89) 

24- ''उन (काफिरों) गैर-मुस्लिमो से लड़ों! अल्लाहतुम्हारे हाथों उन्हें यातना देगा, और उन्हें रुसवा करेगा और उनके मुकाबले में तुम्हारी सहायता करेगा, और 'ईमान' वालोंलोगों के दिल ठंडे करेगा'' - (कुरान 9:14). 

संक्षेप

अभी हमें 24 आयतों के बारे में ही जानकारी उपलब्ध हो सकी है. कुरान की वर्सेस पर पहली बार कोई मुकदमा नहीं डाला गया है पहले भी कई बार एसा हो चूका है. फिक्र ना करें ना पहले कुछ हुआ है ना अब कुछ हो पाएगा.  

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