इस्लाम में हलाला क्या है ? अल्लाह ने निकाह हलाला कुरान में कहा फरमाया है ? - The Allah

Monday, March 15, 2021

इस्लाम में हलाला क्या है ? अल्लाह ने निकाह हलाला कुरान में कहा फरमाया है ?

हलाला - यह एक अरबी शब्द है इसके मायने हैं काबिल बनाना या फिर इस्लामिक कानून के मुताबिक बनाना, यह सब शरीयत का हिस्सा है. हलाला एक प्राचीन प्रथा है इस्लामिक रस्मो रिवाज है जिस पर गैर मुसलमानों और बड़े-बड़े एक्टिविस्ट द्वारा कुछ ज्यादा ही सवाल उठाए गए. जिनकी वजह से इस्लामिक विद्वान मौलाना सूफी इमाम आदि लोग इतना डर जाते हैं कितना शर्मसार हो जाते हैं की इस्लामिक रिवाज को नकारने लगते हैं और कहने लगते हैं कि ऐसा इस्लाम में है ही नहीं. जबकि इस रिवाज में शर्मसार होने लायक कुछ है ही नहीं आज हम आपको इस इस्लामिक रिवाज की हकीकत बताएंगे.

इस्लाम में हलाला क्या है पूरी जानकारी

NIkaah halala kya hai islam me

असल में हलाला कोई आम रस्मो रिवाज नहीं बल्कि एक निकाह है. निकाह हलाला की जरूरत केवल तब होती है जब किसी मियां बीवी का तलाक हो गया हो और वो दोनों वापिस साथ बीबी शौहर बनके रहना चाहते हो.

ऐसे में कुरान सूरह अल बकरा की आयत 230 में हलाला के बारे में फरमाया गया है 

(२: २३०) तब, अगर वह उसे तलाक दे देता है (तीसरी बार, तलाक दो बार उच्चारण करने के बाद), वह उसके लिए तब तक दुबारा निकाह के जायज नहीं होगी जब तक कि वह अपने लिए दूसरा पुरुष चुन नहीं लेती है, और जब वह दूसरा मर्द भी उसे तलाक दे देता है। इसके बाद यदि दोनों एक दूसरे के पास लौट आते हैं, तो कोई दोष नहीं, बशर्ते उन्हें लगता है कि वे अल्लाह द्वारा निर्धारित सीमा के भीतर रखने में सक्षम होंगे। ये अल्लाह की सीमाएं हैं जो वह उन लोगों को स्पष्ट करता है जिन्हें ज्ञान है (उन सीमाओं का उल्लंघन करने के परिणामों के बारे में)।

इस आयत में साफ-साफ फरमाया गया है- अगर किसी औरत का शौहर उसे तीन तलाक दे देता है, तब दोनों का साथ रहना नाजायज हो जाता है. तब वह शख्स उस औरत से दोबारा निकाह तब ही कर पाएगा जब वह औरत किसी दूसरे मर्द से निकाह कर ले और निकाह के बाद वह दूसरा मर्द उसे तलाक दे दे. दूसरे निगाह में भी तलाक होने के बाद ही वह औरत अपने पुराने सोहर के साथ निकाह कर सकती है. प्रक्रिया को हलाला कहते हैं.

हलाला में किस चीज का ध्यान रखना पड़ता है ?

निकाह हलाला करने में कुछ चीजों का विशेष ध्यान रखना पड़ता है, जैसे कि निकाह हलाला केवल दिखावटी ना किया जाए. यानी कि दिखावे के लिए किसी मर्द के साथ निकाह  पढ़ा दिया गया और फिर बिना हमबिस्तरी किए  तलाक करवा दी गई. और इसके बाद मियां बीवी ने वापस आपस में निकाह कर लिया. इस तरह से किया गया खयाली फर्जी दिखावटी या काल्पनिक निकाह हलाला नहीं कहलाता बल्कि हराम है. अली, इब्न मसऊद, अबू हुरैरा और 'उकबाह इब्न' अमीर से प्रसारित एक परंपरा के अनुसार, पैगंबर ने फर्जी रूप से हलाला करने की व्यवस्था करने वालों के साथ-साथ उन लोगों पर भी अपना शाप दिया, जो हलाला जैसे पाक निकाह को काल्पनिक रूप से करना चाहते थे. 

हलाला निकाह एकदम असल का होना चाहिए. यानी की औरत  को किसी शख्स से निकाह करना होगा और उसके साथ बेगम की तरह हमबिस्तर होना हो जब तक वह दूसरा शख्स जिसके साथ लिखा हुआ है चाहे. तब तक उसकी  बेगम बनकर रहना होगा. इसके बाद यदि वो सख्स अपनी मर्जी से औरत को तीन बारी तलाक बोल देता है तो वो औरत वापिस अपने पुराने शौहर के साथ निकाह करने करने के काबिल बन जाती है.

हलाला जायज है या नाजायज 

 हलाला किसी इंसान की बनाई निकाह की रसम नहीं है. अल्लाह द्वारा बताया गया एक निकाह  है. इसलिए इसमें सवाल उठाने की बात ही नहीं आती. कुरान में लिखा एक एक शब्द पुरे ईमान से मानने वाला ही मुसलमान होता है और जो कोई कुरान पर ही सवाल उठाये या उसमे फरमाए गये निकाह हलाला को गलत कुप्रथा व् नाजायज ठहराए तो वो सीधे तौर पर इस्लाम को धोखा देने वाला मुनाफिक है और कुरान को नकारने वाला काफ़िर है. हलाला पूरी तरह से जायज है.

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