हिन्दू जैन बौद्ध सिख लोग काफ़िर है काफिरों के साथ कैसा सुलूक करना चाहिए ? - The Allah

Thursday, March 11, 2021

हिन्दू जैन बौद्ध सिख लोग काफ़िर है काफिरों के साथ कैसा सुलूक करना चाहिए ?

बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम, अस्सलाम वालेकुम, जैसा कि आपको पिछले लेख मुसलमान किसे कहते हैं और काफिर कौन है के अंदर बता दिया गया है काफिर किसे कहते हैं और कौन-कौन समुदाय काफिर हैं. अब यहां अल्लाह के द्वारा पैगंबर मोहम्मद को दिए गए आदेशों को फरमाएंगे जिसमें अल्लाह ने मोहम्मद से बताया है और मोहम्मद ने पूरी कायनात को बताया है कि काफिरों के साथ कैसा सलूक करना है.

कौन-कौन काफ़िर है और क्यों ? समझिए एक नजर में

Hindu Jain bauddh sikh sab kafir hain


हिंदू धर्म यानी सनातन धर्म के लोग खुले काफिर है. इसमें दो बड़े समुदाय हैं एक समुदाय निराकार ईश्वर ॐ को मानता है. यह सिर्फ वेद को ईश्वरीय ग्रंथ मानता है. और ॐ को एकमात्र ईश्वर, इस समुदाय को आर्य समाज कहते हैं. आर्य समाज इस्लाम अल्लाह और मोहम्मद की बात मानने से इनकार करता है जन्नत और जहन्नम को अंधविश्वास बताता है और तो और रोजाना पैगंबर मोहम्मद की शान में गुस्ताखी करता है कुरान पर अनाप-शनाप टिप्पणी करता है. वही दूसरा समुदाय मुशरिको का है यह लोग मूर्तियों की पूजा करते हैं नमाज नहीं करते नाहक और उसके पैगंबर को नहीं मानते.

जैन पंथ के लोग और उनकी किताबें ना तो अल्लाह पर यकीन रखते हैं और ना ही पैगंबर हजरत मोहम्मद को मानते हैं. इन लोगों का अलग ही रवैया चलता रहता है. इनका हर बाबा इनका एक पैगंबर होता है. जिसे यह लोग तीर्थंकर कहते हैं. यह भी हिंदुओं की तरह मूर्ति पूजा करते हैं.

बौद्ध पंथ के लोग नमाज नहीं करते वह उन किताबों को पढ़ते हैं जिनमें अल्लाह और मोहम्मद का कोई जिक्र नहीं है. बौद्ध समुदाय के लोग हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहो अलेही वसल्लम को पैगंबर मानने की बजाय सिद्धार्थ और बुद्ध को अपना इल्म देने वाला मानते हैं. यह लोग बुद्ध की मूर्ति बनाकर उसकी इबादत करते हैं.

सिख पंथ के लोग गुरु नानक को अपना पैगंबर मानते हैं और ओमकार को अपना खुदा. इन लोगों की तारीख इस्लाम के खिलाफ काफी गंदगी रही है. भारत की तारीख में इस्लाम की सबसे अच्छे बादशाहो ने सिक्खों के कई गुरुओं को काफिराना करने के जुर्म में मौत की सजा दी है. यह लोग भी काफिर हैं.

यहूदी और ईसाई- जब अल्लाह ने हजरत मोहम्मद साहब को अपना पैगंबर बनाकर धरती पर भेजा तमाम आवाम ने पैगंबर की बातों के पर चलना शुरू कर दिया, पर यहूदी और ईसाई जीसस और अब्राहम की बातों पर ही चल रहे हैं. जो अल्लाह ने खुद ही मोहम्मद साहब सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को पैगंबर बनाकर भेजा पूरी होगी और ईसाइयों को भी उन्हीं के अनुसार चलना चाहिए. और यकीन करना चाहिए कि पैगंबर मोहम्मद सल्लल्लाहो अलेही वसल्लम ही आखरी पैगंबर है. जब तक ईसाई और यहूदी इस बात पर ईमान नहीं लाते तब तक वह भी काफिर है.

काफिरों के साथ कैसा सलूक करना चाहिए ?

हिन्दू जैन बौद्ध सिख लोग काफ़िर है, इन काफिरों के साथ कैसा सलूक करना चाहिए, जानिए कुरान में अल्लाह ने क्या कहा है. यहां कुरान की आयतों के हवाले से काफिरों के साथ कैसा सलूक करना है यह बताया जा रहा है तुम मुसलमानों ध्यान देकर पढ़ो, और इसे हकीकत में उतारो.

''फिर, रमजान का महीना) बीत जाऐं, तो 'मुश्रिको' को जहाँ-कहीं पाओ कत्ल करो, और पकड़ो और उन्हें घेरो और हर घातकी जगह उनकी ताक में बैठो। - (कुरान 9:5)

''हे 'ईमान' लाने वालो (केवल एक आल्ला को मानने वालो ) 'मुश्रिक' नापाक (अपवित्र)हैं।'' - (कुरान 9:28)

''निःसंदेह 'काफिर (गैर-मुस्लिम)तुम्हारे खुले दुश्मन हैं।'' (कुरान 4:101).

''हे 'ईमान' लाने वालों! (मुसलमानों) उन 'काफिरों' (गैर-मुस्लिमो) से लड़ो जो तुम्हारे आस पास हैं, और चाहिए कि वे तुम में सखती पायें।'' (कुरान 9:123)

जिन लोगों ने कुरान को मानने से इनकार किया अल्लाह  उनके साथ क्या करेगा

 ''जिन लोगों ने हमारी ''आयतों'' का इन्कार किया (इस्लाम व कुरान को मानने से इंकार) , उन्हें हम जल्द अग्नि में झोंक देंगे। जब उनकी खालें पक जाएंगी तो हम उन्हें दूसरी खालों से बदल देंगे ताकि वे यातना का रसास्वादन कर लें। निःसन्देह अल्लाह प्रभुत्वशाली तत्वदर्शी हैं'' (कुरान 4:56).

वालिद और भाई काफिर बन जाए तो उनके साथ क्या करें

 ''हे 'ईमान' लाने वालों! (मुसलमानों)अपने बापों और भाईयों को अपना मित्रमत बनाओ यदि वे ईमान की अपेक्षा'कुफ्र' (इस्लाम को धोखा) को पसन्द करें। और तुम में से जो कोई उनसे मित्रता का नाता जोड़ेगा, तो ऐसे ही लोग जालिम होंगे, इसलिए उनसे नाता तोड़ दो '' - (कुरान 9:23)

 ''अल्लाह 'काफिर' लोगों (गैर-मुस्लिमो ) को मार्ग नहीं दिखाता'' - (कुरान9:37)

"ऐ ईमान (अल्ला पर यकिन) लानेवालो! तुमसे पहले जिनको किताब दी गई थी, जिन्होंने तुम्हारे धर्म को हँसी-खेल बना लिया है, उन्हें और इनकार करनेवालों को अपना मित्र न बनाओ। और अल्लाह का डर रखों यदि तुम ईमानवाले हो (कुरान5:57)

अल्लाह के सिवा किसी और को पूजने वालो और मूर्तिपूजकों के साथ कैसा सुलूक करें 

 (मुनाफिक) मूर्तिपूजक जहां कही पाए जाऐंगे पकड़े जाएंगे और बुरी तरह कत्ल किए जाएंगे।'' (कुरान 33:61)

 निश्चय ही तुम और वह जिसे तुम अल्लाह के सिवा (दूसरे भगवान को मानना) पूजते थे 'जहन्नम' का ईधन हो। तुम अवश्य उसके घाट उतरोगे।'' - कुरान 21:98

'और उस से बढ़कर जालिम कौन होगा जिसे उसके 'रब' की आयतों के द्वारा चेताया जाये और फिर वह उनसे मुँह फेरले (इस्लाम छोड दे) निश्चय ही हमें ऐसे अपराधियों से बदला लेना है।'' - (कुरान 32:22)

 यहूदियों और ईसाइयों के साथ कैसा सलूक करें

 ''हे 'ईमान' लाने वालों! तुम यहूदियों और ईसाईयों को मित्र संबंध न बनाओ। (कुरान 5:51). 

अल्लाह ने साफ तौर पर मुस्लिमों को बताया है कि काफिरों मुनाफिकों के साथ कैसा बर्ताव करना है. अगर मुसलमान मजबूर है तो कुछ समय के लिए काफिरों को दिखावे के तौर पर अपना दोस्त बना सकता है. लेकिन आखिरी तक अल्लाह के हुक्म की तामील करना जरूरी है वरना मुसलमान होकर भी काफिर की तरह जहन्नम  में जाना पड़ेगा. क्योंकि काफिरों की सिर्फ एक सजा है सजा-ए-मौत. गर सजाये मौत देना मुमकिन न हो तो अल्लाह ने और भी रस्ते बताये हैं काफिरों मुनाफिकों से निपटने के. उन पर अमल लाये.

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