The Allah

Thursday, August 12, 2021

बुद्ध का जन्म कैसे हुआ था ? क्या है बुद्ध उर्फ सिद्धार्थ की पैदाईस की हकीकत

इंसान जब शैतान के साये में आ जाता है तो कुफ्र में चला जाता है और काफिराना हरकते करने लगता है। उसकी इन्ही हरकतों से अल्लाह उसपर अज़ाब लाता है। बुद्ध के मामले में भी ऐसा ही हुआ था।

कौन था बुद्ध
असल मे बुद्ध जैसा कोई नही था, एक शख्स जिसका नाम सिद्धार्थ था उसने खुद ही खुद का नाम बदलकर बुद्ध में तब्दील कर दिया था।

सिद्धार्थ बचपन से ही मूर्ख था, इतना मूर्ख की उसका घोड़ागाड़ी चलाने वाला गुलाम चन्ना उसके सामने अक्लमंद साबित होता था।

लेकिन धीरे धीरे सिद्धार्थ को समझ आती गयी कि वो आम इंसान नही है बल्कि शैतान का बीज है।

शैतान का बन्दा अपने मुकाम पर
 शैतान को हमेशा से ही अल्लाह के बंदों पर राज करने और उन्हें अपना नुमाइंदा बनाने अपने इशारे पर नचाने की सनक लगी हुई है।

सिद्धार्थ ने भी वही किया इसने सबसे पहले हिन्दू धर्म की किताबों से एक नाम चुराया और खुद को उसका अवतार घोषित किया। आपको बता दें कि हिंदुओं में भगवान का एक नाम विष्णु है और उस विष्णु के कई वतार है जिनमे से एक का नाम बुद्ध था।

लोगो ने इसे बुद्ध समझकर उसकी बातें मन्ना शुरू कर दिया। और यही से इस काफिर ने भी कुफ्र फैलाना शुरू किया।

इसका मानना था कि दुनिया किसी ने नही बनाई, इस अन्धविश्वासी की माने तो दुनिया अपने आप जादू से बन गई 😂

इस काफिर ने इस जहान में सबसे ज्यादा दीन को नुकसान पहुचाया है। अब सवाल ये है कि अनेको काफिर है इस दुनिया मे लेकिन अन्धविश्वास फैलाने में खुद को सबसे ताकतवर घोषित करने में ये काफिर बुद्ध ही सफल क्यों हुआ।

शैतान का बच्चा बुद्ध
चूंकि बुद्ध आम इंसान नही बल्कि शैतान का औलाद था। इसकी अम्मी महामाया जिसके शौहर का नाम सुद्दोधन था। इन दोनों के कोई औलाद नही हुई थी। एक रात महामाया के सपने में शैतान हाथी का भेष बनाकर आया, और महामाया के साथ जोर आजमाइश करते हुए खूब जिना किया, और उसकी शैतानी ताकत के चलते दूसरे दिन ही महामाया ने एक बच्चे को जन्म दे दिया।

अब आप समझ ही गए होंगे सिद्धार्थ इतना ताकतवर क्यों था।

सिद्धार्थ का असली बाप यानी शैतानो का शैतान हाथी की शक्ल में आया था इसलिए सिद्धार्थ ने अपने गिरोह में हाथी को काफी ऊंचा ओहदा दिया।

Saturday, March 13, 2021

मोहम्मद साहब का करिश्मा : रसूल अल्लाह के एक इशारे पर जब हुए चाँद के दो टुकड़े

पैगंबर हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की तारीफ कुछ भी कहा जाए वह कम पड़ जाएगा. मोहम्मद साहब पूरी कायनात में सबसे अनोखे इंसान थे जिसे अल्लाह ने नेक मकसद के लिए चुना था. नबी के बारे में तरह-तरह के रोचक किस्से कहानियों का समंदर बना पड़ा है कहानियां कम नहीं होंगी इंसान कम पड़ जाएंगे. ऐसा ही एक ऐसा है जो हजरत मोहम्मद साहब ने बातों बातों में ही चांद के दो टुकड़े कर दिए थे. आइए जानी उस कहानी के बारे में.

चांद के दो टुकड़े करने की करिश्मा की कहानी

Nabi muhammad ne chand ke do tukde kar diye

 जब अल्लाह ने हजरत मोहम्मद को बताया कि मैं तुम्हें अपना पैगाम इंसानों तक पहुंचाने के लिए पैगंबर बनाता हूं. और यह बात जब मोहम्मद साहब ने मक्का शरीफ के लोगों को बताई तो उसमें से अनेकों लोगों ने इस बात पर यकीन करने से इंकार कर दिया. उन्होंने सवालिया निशान लगाते हुए कहा "अगर तुम सच्चे नबी हो तो चांद के दो टुकड़े करके दिखाओ."
लोगों के द्वारा ऐसी बात बोले जाने पर हजरत मोहम्मद साहब मुस्कुराए उन्होंने कहा अगर मैं ऐसा कर देता हूं तब तो तुम यकीन लाओगे ? ऐसा कहकर नबी हजरत मोहम्मद ने आसमान की ओर देखा और अल्लाह को याद किया. अल्लाह ने देखा कि हजरत मोहम्मद साहब की नबूवत को साबित करने के लिए करिश्मा करने की जरूरत है. तो जैसे ही हजरत मोहम्मद साहब ने अल्लाह को याद करके आसमान में दिखाई दे रहे चांद की तरफ ऊँगली की चांद के दो टुकड़े हो गए.

देखने वाले लोगों को अपनी आंखों पर यकीन नहीं हो रहा था, आगे क्या हुआ हदीस की रोशनी से आपको बताते हैं.

बुखारी शरीफ की हदीस नंबर 3637 और मुस्लिम शरीफ की हदीस नंबर 7076 में कहा गया है -

हज़रत अनस रजियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि मक्का शरीफ के कुफ्फार ने रसुल अल्लाह (स.) से सवाल किया कि आप अगर नबी है तो अपनी नबुव्वत की कोई निशानी दिखायें हमें मोजिजा दिखायें ! तो रसुल अल्लाह (स.) ने चांद की तरफ अपनी उंगली से इशारा करके चांद के दो टुकडे कर के दिखाये.

सहीह बुखारी किताब 54 हदीस नंबर 830 इसी किस्से का जिक्र किया गया है-

हज़रत इब्ने मसऊद रजियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसुल अल्लाह (स.) के जमाने में चांद के दो टूकडे हुए एक पहाड के ऊपर था और एक नीचे तो रसुल अल्लाह (स.) ने फरमाया ए लोगों इस पर गवाह रहो.

दोनों हदीसों का मकसद एक ही है यह दोनों एक ही करिश्मा का जिक्र कर रही है. - जब काफिरों ने नबी की नबूवत पर सवाल उठाया और कोई करिश्मा दिखाने को कहा उन नबी ने चाँद की तरफ इशारा करके उसके दो टुकड़े कर दिए . जब रसूल अल्लाह ने चांद के दो टुकड़े किए तो टुकड़े ऐसे हुए, एक टुकड़ा पहाड़ के ऊपर पड़ा था तो दूसरा पहाड़ के नीचे. रसूल अल्लाह ने कुफ्फर की तरफ देखकर कहा - ए लोगो इस बात के गवाह बनो.

Wednesday, March 10, 2021

इस्लाम क्या है ?

 

दुनिया बनाने वाले ने कुछ कायदे कानून बनाए थे और दुनिया बनाने वाले खुदा याने अल्लाह ने हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को उन कायदे कानूनों से रूबरू करवाया था. अल्लाह ने किताब के रूप में कायदे कानून हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहो अलेही वसल्लम पर उतारे थे, उसी किताब को कुरान कहते हैं. कुरान में बताए गए उन कायदे कानूनों को अल्लाह का इस्लाम कहते हैं.

कुरान की बताई गई तरीके पर चलने वाली कौम को मुसलमान कहते हैं. मुसलमान भी कई प्रकार के होते हैं जिनके बारे में बाद में आपको रूबरू करवाया जाएगा.

हजरत मोहम्मद साहब कुरेश कबीले में पैदा हुए मुसलमान थे, कुरेश लोगों के ऊपर अल्लाह की नेमत काफी ज्यादा ही रही है.

बुनियादी तौर पर बताया जाए तो इस्लाम कुरान और हदीस के मुताबिक बने कायदे कानून और तौर-तरीकों को कहते हैं. जिन पर चलने वाले  मुसलमान कयामत के बाद जन्नत में दाखिल होंगे और उन कायदे कानूनों पर पर ना चलने वाले लोग जहन्नम में जाएंगे.

Sunday, May 26, 2013

भारत का पहला बलात्कारी कौन था ? जानिए भीमराव अंबेडकर द्वारा करुणा यादव संग किये गए दुष्कर्म का इतिहास

आप वर्तमान में ऐसे कई मामले देखते हैं जिनमें अक्सर कुछ ऐसे व्यक्ति राजनीतिक ताकत पाकर बड़े रुतबे वाले हो जाते हैं और अपने बारे में अच्छी-अच्छी बातें प्रचारित करवा लेते हैं तथा अपने कुकर्म और बुरी चीजों को पैसे और रसूख के दम पर छिपा देते है. भीमराव अंबेडकर के मामले में भी ऐसा ही हुआ था.


20 जनवरी 1954 यह वह दिन था जब भीमराव अंबेडकर महाराष्ट्र के भंडारा शहर में चुनाव प्रचार के लिए निकले थे, क्योंकि ये वहीं से लोकसभा के उपचुनाव में उम्मीदवार थे. चुनाव प्रचार के दौरान वह एक यादव परिवार के घर में वोट मांगने गए. वह गरीब यादव परिवार था घर के मुखिया का नाम विवेक यादव था, घर में कुल 5 सदस्य थे. घर का मुखिया विवेक यादव, उसकी मां, उस की पत्नी और उसके दो बच्चे. बच्चों में एक लड़की जो 17 साल की थी और एक 12 साल का लड़का पुष्कर यादव.

विवेक यादव की बेटी पर पड़ी थी आंबेडकर की बुरी नज़र

भीमराव अंबेडकर के पास राजनीतिक समर्थन था उनकी पार्टी एससीएफ को अंग्रेजो (मुख्यतः ए वी अलेक्सेंडर) के द्वारा खूब फंड मिलता था. इसलिए वह जो चाहते थे करते थे.

चुनाव से संबंधित बातें बताने के बाद उन्होंने यादव परिवार से उनकी पार्टी के संबंध में वोट करने की अपील की, इसी बीच विवेक यादव की बेटी करुणा यादव आंगन से गुजरी उस पर भीमराव अंबेडकर की नजर पड़ गई. वोट मांगने के बाद भीमराव अंबेडकर घर से निकल कर आगे बढ़ गए.

पूरा दिन गुजरने के बाद शाम के वक्त अपने कार्यकर्ताओं के साथ भीमराव अंबेडकर फिर से विवेक यादव के दरवाजे पर आ गए. जैसे ही विवेक यादव ने दरवाजा खोला भीमराव अंबेडकर की पार्टी s.c.f. के कार्यकर्ताओं ने विवेक यादव को पकड़ लिया उसे मारा-पीटा और फिर उसे, उसकी माता और विवेक की पत्नी शकुंतला को बांधकर कमरे में बंद कर दिया.

करुना यादव संग बलात्कार

तीनो को कमरे में बंद करने के बाद भीमराव अंबेडकर के कार्यकर्ताओं ने करुणा यादव को पकड़ा और उसे दूसरे कमरे में ले गए, कार्यकर्ता कमरे से बाहर निकल आए और भीमराव अंबेडकर अंदर गए, कमरे से बच्ची की चीख पुकार की आवाजें उसके माता पिता को सुनाई देतीं रहीं. कुछ देर बाद भीमराव अंबेडकर जल्दी से कमरे से बाहर निकल आए और अपने कार्यकर्ताओं समेत विवेक यादव के घर से चले गए.

किसी ने सोचा भी नही था कि जनसेवक का चोला पहनकर घूम रहा ये इंसान अपनी हवस में इतना अंधा हो जाएगा कि किसी को बच्ची का बलात्कार कर डालेगा। पर हमेशा जो सोचो वो नही होता, असिलियत तो यही थी कि भीमराव अंबेडकर ने 17 वर्षीय करुणा यादव का बलात्कार कर डाला था।

लड़की करुणा यादव का छोटा भाई सब देख रहा था

अंबेडकर और उनकी पार्टी एससीएफ के कार्यकर्ता भूल गए थे कि घर में 12 साल का एक लड़का और है. जो इन लोगों के द्वारा उसके पिता विवेक यादव को मारने पीटने से डर गया था, और आंगन में चूल्हे में चलाई जाने वाली लकड़ियों के गट्ठर के ढेर के पास छुप कर बैठ गया था. अंधेरा होने की वजह से कार्यकर्ता उसे देख नहीं पाए.

भीमराव अंबेडकर और उसकी पार्टी s.c.f. के लोगों के जाने के बाद उसने दरवाजा खोला और मम्मी पापा के हाथ को खोल दिया. विवेक यादव ने दूसरे कमरे में जाकर देखा तो उनकी बेटी करुणा यादव क्षत-विक्षत हालत में पड़ी थी, कपड़े फटे हुए थे. करुणा यादव उस यादव परिवार की लाडली बेटी थी. बेसुध हालत में पड़ी अपनी बेटी को देखकर विवेक यादव की पत्नी बहुत जोर जोर से चिल्लाने लगी. रोने की आवाज सुनकर मोहल्ले वाले लोग इकट्ठा हो गए.

सबको लग गयी खबर की आंबेडकर ने बच्ची की अस्मत लूटी

सुबह होते होते यह खबर पूरे इलाके में फैल गई विवेक यादव और उसका परिवार काफी गरीब थे इसलिए वह भीमराव अंबेडकर को सजा नहीं दिलवा सके परंतु भीमराव अंबेडकर के इस दुष्कर्म का असर चुनाव पर पड़ा. भीमराव अंबेडकर चुनाव हार गया किसी ने भी उसे वोट नहीं दिया, इतना ही नहीं उसके बाद वाले सभी चुनाव भीमराव अंबेडकर हारते चले गए.

इस्लाम कबूल करने का आग्रह

अपने अपराध की वजह से भीमराव अंबेडकर को हर जगह बदनामी का सामना करना पड़ा था. इसी बीच कई मुस्लिमों ने उन्हें सलाह दी कि आइए आप इस्लाम को कबूल कर लीजिए और फिर सब सही हो जाएगा. क्योंकि मुसलमान एकजुट होकर के वोट करते हैं इसलिए आप चुनाव में जीत भी जाएंगे.

भीमराव अंबेडकर को पता था कि अभी 1947 यानी कुछ सात साल पहले ही भारत पाकिस्तान बंटवारा हुआ है, जिसमे कट्टरपंथी मुस्लिमों द्वारा अनेकों लोगों की जान ले ली गई है इसलिए हिंदू मुस्लिम दंगे की आग काफी भयंकर रूप में है , बंटवारे में पाकिस्तान में बचे दलित लोगों पर भी मुसलमानों ने भयंकर अत्याचार और कत्लेआम किया था. इसीलिए इस्लाम कबूल करना ठीक नहीं होगा इससे तो और बदनामी होगी. ऊपर से दलित वोट भी चला जाएगा.

दूसरी तरफ भीमराव अंबेडकर को सैद्धांतिक रुप से भी इस्लाम पसंद नहीं था, वो इस्लाम के बहुत कट्टर विरोधी भी थे, उन्होंने अपनी कई पुस्तकों में इस्लाम को आतंक का पंथ तथा मुस्लिमो को देश का बटवारा करवाने का जिम्मेदार माना है. इसीलिए उन्होंने इस्लाम कबूल नहीं किया. 

साफ शब्दों में कहूँ तो अम्बेडकर की मानसिकता ईसाईयों की सरपरस्ती में रहकर ऐसी हो गयी थी कि वो मुसलमानों से नफरत करने लगा था।

बौद्ध धम्म के तले जाना

एक तो वैसे भी भीमराव अंबेडकर जातिवादी राजनीति करते थे जातियों की आपस में लड़ाई करते थे वह भी इतना बड़ा अपराध नहीं माना गया परंतु एक लड़की का रेप करने के बाद हिंदू समाज में भीमराव अंबेडकर का जीना हराम हो गया था. इसलिए मजबूरी वश भीमराव अंबेडकर ने 2 साल बाद 14 अक्टूबर 1956 को बौद्ध धर्म की दीक्षा ले ली. बौद्ध धर्म में दीक्षा लेने का मुद्दा काफी प्रचारित हुआ हर जगह उसकी चर्चा होने लगी और कुछ समय के लिए करुना यादव के बलात्कार का मुद्दा ठंडा पड़ गया, लोग भीमराव आंबेडकर द्वारा किये गए घ्रणित दुष्कर्म को भूल गए.

पीड़ित यादव परिवार रातों रात गायब हुआ, लोगो ने बताया आंबेडकर ने मरवा दिया

इधर भीमराव अंबेडकर ने बौद्ध धर्म की दीक्षा ली, अगले ही महीने वह परिवार जिसकी 17 साल की बच्ची करुणा यादव का भीमराव अंबेडकर ने बलात्कार किया था, वह गरीब परिवार रातों-रात गायब हो गया. गांव वालों का कहना था कि रात को SCF के कुछ लोग आए थे भयंकर मारपीट की और उन्हें अपहरण कर ले गए. 

कई चश्मदीदों ने बताया कि रात को हथियार लेकर कई लोग आए थे इसी वजह से हम लोगों की हिम्मत नहीं हुई, विवेक यादव और उनके परिवार को मार डाला गया और उनकी लाशों को गायब कर दिया गया.

जब विवेक यादव की रिश्तेदारों को पता चला कि विवेक यादव और उसके परिवार की बेरहमी से हत्या कर दी गई है, तो उन्हें समझते देर न लगी कि यह किसने करवाया होगा.

बौद्ध धम्म में जाने के 2 महीने बाद ही गुजर गए आंबेडकर

भीमराव अंबेडकर के ऊपर छींटाकसी और प्रहार होने लगे थे. सब कोई जानता था कि इस व्यक्ति ने क्या-क्या अपराध किए और करवाए हैं.

इन सभी अपराधों का भार लेकर 6 दिसंबर 1956 को भीमराव अंबेडकर की मौत हो गई. यानी कि भीमराव अंबेडकर और उनके अपराधों दोनों का अंत हो गया. बौद्ध धर्म की दीक्षा लेने के 2 महीने बाद ही भीमराव अंबेडकर गुजर गए.