The Allah

Friday, March 19, 2021

तलाक क्या है ? तलाक किसने बनाई ? जानिए Triple Talaq तलाक-ए-बिद्द्त की हकीकत कुरान से

तलाक एक ऐसा शब्द है जो रिश्तो को तोड़ता है यह एक अरबी शब्द है , इस्लाम में इस शब्द से जुड़ी है एक प्रथा है जिसे आम भाषा में तीन तलाक, अंग्रेजी में ट्रिपल तलाक और अरबी में तलाक-ए-बिद्द्त के नाम से जाना जाता है.

तलाक, ट्रिपल तलाक अथवा तलाक-ए-बिद्द्त क्या है ?

Talaq kya hai talaq kisne banayi janiye talak ke bare me

तलाक एक अरबी शब्द है जिसे ट्रिपल तलाक और तलाक-ए-बिद्द्त भी कहा जाता है. अल कुरान सूरह अल बकरा की आयत 229 और 230 में तीन तलाक और हलाला के बारे में बताया गया है. हलाला क्या है यह हम आपको पहले ही बता चुके हैं. आयत 229 और 230 के अनुसार यदि कोई शख्स अपनी औरत से तीन बार तलाक तलाक तलाक बोल देता है तो दोनों का निकाह खत्म हो जाता है. अब वह औरत उस आदमी के साथ घर में रहने की हकदार नहीं है. अब उसे अपने मायके लौट जाना होगा. तलाक की यह प्रक्रिया निकाह को खत्म करने के लिए बनाई गई है.

तलाक किसने बनाई ?

दुनिया में तलाक का पहला जिक्र कुरान में आया है कुरान पैगंबर हजरत मोहम्मद के द्वारा कहीं गई थी और पैगंबर हजरत मोहम्मद के अनुसार यह सब बातें जो कुछ भी कुरान में लिखी हैं अल्लाह ने हजरत मोहम्मद साहब तक भेजी थी. यानी कि ट्रिपल तलाक अल्लाह और पैगंबर हजरत मोहम्मद ने बनाई.

तलाक कौन दे सकता है ? क्या मुसलमान औरत अपने शौहर को तलाक दे सकती है ?

यह सवाल अक्सर मुसलमानों के मन में उठता रहता है. कुरान में जो जिक्र किया गया है उसके अनुसार आदमी अपनी औरत को तीन बार तलाक बोलकर तलाक दे सकता है. पर कुरान में ऐसा कोई भी नियम नहीं है जिसके अनुसार औरत अपने आदमी को तलाक दे सके. तलाक देने का हक सिर्फ आदमियों को होता है औरतों को नहीं.

तलाक की जरूरत क्या है ?

कोई आदमी किसलिए निकाह करता है ताकि वह औरत के साथ सिर्फ मजे ही नहीं बल्कि जायज  बच्चे पैदा कर सके और दीनी दुनिया में तरक्की करते हुए जन्नत जा सके. पर जब जिस औरतके साथ उसका निकाह हुआ हो उसके साथ उसे वो मज़े न मिले जिसकी वो उम्मीद किये था,  ऐसे में जब मजा किरकिरा होने लगे या फिर उस औरत से मन भर जाए या फिर पुरानी औरत को छोड़कर नया निकाह करने की मर्जी हो तो ऐसे में अल्लाह और पैगंबर मोहम्मद पर यकीन करने वाले यानी मुसलमान के पास औरत को तलाक देने का अधिकार है.

Monday, March 15, 2021

इस्लाम में हलाला क्या है ? अल्लाह ने निकाह हलाला कुरान में कहा फरमाया है ?

हलाला - यह एक अरबी शब्द है इसके मायने हैं काबिल बनाना या फिर इस्लामिक कानून के मुताबिक बनाना, यह सब शरीयत का हिस्सा है. हलाला एक प्राचीन प्रथा है इस्लामिक रस्मो रिवाज है जिस पर गैर मुसलमानों और बड़े-बड़े एक्टिविस्ट द्वारा कुछ ज्यादा ही सवाल उठाए गए. जिनकी वजह से इस्लामिक विद्वान मौलाना सूफी इमाम आदि लोग इतना डर जाते हैं कितना शर्मसार हो जाते हैं की इस्लामिक रिवाज को नकारने लगते हैं और कहने लगते हैं कि ऐसा इस्लाम में है ही नहीं. जबकि इस रिवाज में शर्मसार होने लायक कुछ है ही नहीं आज हम आपको इस इस्लामिक रिवाज की हकीकत बताएंगे.

इस्लाम में हलाला क्या है पूरी जानकारी

NIkaah halala kya hai islam me

असल में हलाला कोई आम रस्मो रिवाज नहीं बल्कि एक निकाह है. निकाह हलाला की जरूरत केवल तब होती है जब किसी मियां बीवी का तलाक हो गया हो और वो दोनों वापिस साथ बीबी शौहर बनके रहना चाहते हो.

ऐसे में कुरान सूरह अल बकरा की आयत 230 में हलाला के बारे में फरमाया गया है 

(२: २३०) तब, अगर वह उसे तलाक दे देता है (तीसरी बार, तलाक दो बार उच्चारण करने के बाद), वह उसके लिए तब तक दुबारा निकाह के जायज नहीं होगी जब तक कि वह अपने लिए दूसरा पुरुष चुन नहीं लेती है, और जब वह दूसरा मर्द भी उसे तलाक दे देता है। इसके बाद यदि दोनों एक दूसरे के पास लौट आते हैं, तो कोई दोष नहीं, बशर्ते उन्हें लगता है कि वे अल्लाह द्वारा निर्धारित सीमा के भीतर रखने में सक्षम होंगे। ये अल्लाह की सीमाएं हैं जो वह उन लोगों को स्पष्ट करता है जिन्हें ज्ञान है (उन सीमाओं का उल्लंघन करने के परिणामों के बारे में)।

इस आयत में साफ-साफ फरमाया गया है- अगर किसी औरत का शौहर उसे तीन तलाक दे देता है, तब दोनों का साथ रहना नाजायज हो जाता है. तब वह शख्स उस औरत से दोबारा निकाह तब ही कर पाएगा जब वह औरत किसी दूसरे मर्द से निकाह कर ले और निकाह के बाद वह दूसरा मर्द उसे तलाक दे दे. दूसरे निगाह में भी तलाक होने के बाद ही वह औरत अपने पुराने सोहर के साथ निकाह कर सकती है. प्रक्रिया को हलाला कहते हैं.

हलाला में किस चीज का ध्यान रखना पड़ता है ?

निकाह हलाला करने में कुछ चीजों का विशेष ध्यान रखना पड़ता है, जैसे कि निकाह हलाला केवल दिखावटी ना किया जाए. यानी कि दिखावे के लिए किसी मर्द के साथ निकाह  पढ़ा दिया गया और फिर बिना हमबिस्तरी किए  तलाक करवा दी गई. और इसके बाद मियां बीवी ने वापस आपस में निकाह कर लिया. इस तरह से किया गया खयाली फर्जी दिखावटी या काल्पनिक निकाह हलाला नहीं कहलाता बल्कि हराम है. अली, इब्न मसऊद, अबू हुरैरा और 'उकबाह इब्न' अमीर से प्रसारित एक परंपरा के अनुसार, पैगंबर ने फर्जी रूप से हलाला करने की व्यवस्था करने वालों के साथ-साथ उन लोगों पर भी अपना शाप दिया, जो हलाला जैसे पाक निकाह को काल्पनिक रूप से करना चाहते थे. 

हलाला निकाह एकदम असल का होना चाहिए. यानी की औरत  को किसी शख्स से निकाह करना होगा और उसके साथ बेगम की तरह हमबिस्तर होना हो जब तक वह दूसरा शख्स जिसके साथ लिखा हुआ है चाहे. तब तक उसकी  बेगम बनकर रहना होगा. इसके बाद यदि वो सख्स अपनी मर्जी से औरत को तीन बारी तलाक बोल देता है तो वो औरत वापिस अपने पुराने शौहर के साथ निकाह करने करने के काबिल बन जाती है.

हलाला जायज है या नाजायज 

 हलाला किसी इंसान की बनाई निकाह की रसम नहीं है. अल्लाह द्वारा बताया गया एक निकाह  है. इसलिए इसमें सवाल उठाने की बात ही नहीं आती. कुरान में लिखा एक एक शब्द पुरे ईमान से मानने वाला ही मुसलमान होता है और जो कोई कुरान पर ही सवाल उठाये या उसमे फरमाए गये निकाह हलाला को गलत कुप्रथा व् नाजायज ठहराए तो वो सीधे तौर पर इस्लाम को धोखा देने वाला मुनाफिक है और कुरान को नकारने वाला काफ़िर है. हलाला पूरी तरह से जायज है.

Saturday, March 13, 2021

मोहम्मद साहब का करिश्मा : रसूल अल्लाह के एक इशारे पर जब हुए चाँद के दो टुकड़े

पैगंबर हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की तारीफ कुछ भी कहा जाए वह कम पड़ जाएगा. मोहम्मद साहब पूरी कायनात में सबसे अनोखे इंसान थे जिसे अल्लाह ने नेक मकसद के लिए चुना था. नबी के बारे में तरह-तरह के रोचक किस्से कहानियों का समंदर बना पड़ा है कहानियां कम नहीं होंगी इंसान कम पड़ जाएंगे. ऐसा ही एक ऐसा है जो हजरत मोहम्मद साहब ने बातों बातों में ही चांद के दो टुकड़े कर दिए थे. आइए जानी उस कहानी के बारे में.

चांद के दो टुकड़े करने की करिश्मा की कहानी

Nabi muhammad ne chand ke do tukde kar diye

 जब अल्लाह ने हजरत मोहम्मद को बताया कि मैं तुम्हें अपना पैगाम इंसानों तक पहुंचाने के लिए पैगंबर बनाता हूं. और यह बात जब मोहम्मद साहब ने मक्का शरीफ के लोगों को बताई तो उसमें से अनेकों लोगों ने इस बात पर यकीन करने से इंकार कर दिया. उन्होंने सवालिया निशान लगाते हुए कहा "अगर तुम सच्चे नबी हो तो चांद के दो टुकड़े करके दिखाओ."
लोगों के द्वारा ऐसी बात बोले जाने पर हजरत मोहम्मद साहब मुस्कुराए उन्होंने कहा अगर मैं ऐसा कर देता हूं तब तो तुम यकीन लाओगे ? ऐसा कहकर नबी हजरत मोहम्मद ने आसमान की ओर देखा और अल्लाह को याद किया. अल्लाह ने देखा कि हजरत मोहम्मद साहब की नबूवत को साबित करने के लिए करिश्मा करने की जरूरत है. तो जैसे ही हजरत मोहम्मद साहब ने अल्लाह को याद करके आसमान में दिखाई दे रहे चांद की तरफ ऊँगली की चांद के दो टुकड़े हो गए.

देखने वाले लोगों को अपनी आंखों पर यकीन नहीं हो रहा था, आगे क्या हुआ हदीस की रोशनी से आपको बताते हैं.

बुखारी शरीफ की हदीस नंबर 3637 और मुस्लिम शरीफ की हदीस नंबर 7076 में कहा गया है -

हज़रत अनस रजियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि मक्का शरीफ के कुफ्फार ने रसुल अल्लाह (स.) से सवाल किया कि आप अगर नबी है तो अपनी नबुव्वत की कोई निशानी दिखायें हमें मोजिजा दिखायें ! तो रसुल अल्लाह (स.) ने चांद की तरफ अपनी उंगली से इशारा करके चांद के दो टुकडे कर के दिखाये.

सहीह बुखारी किताब 54 हदीस नंबर 830 इसी किस्से का जिक्र किया गया है-

हज़रत इब्ने मसऊद रजियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसुल अल्लाह (स.) के जमाने में चांद के दो टूकडे हुए एक पहाड के ऊपर था और एक नीचे तो रसुल अल्लाह (स.) ने फरमाया ए लोगों इस पर गवाह रहो.

दोनों हदीसों का मकसद एक ही है यह दोनों एक ही करिश्मा का जिक्र कर रही है. - जब काफिरों ने नबी की नबूवत पर सवाल उठाया और कोई करिश्मा दिखाने को कहा उन नबी ने चाँद की तरफ इशारा करके उसके दो टुकड़े कर दिए . जब रसूल अल्लाह ने चांद के दो टुकड़े किए तो टुकड़े ऐसे हुए, एक टुकड़ा पहाड़ के ऊपर पड़ा था तो दूसरा पहाड़ के नीचे. रसूल अल्लाह ने कुफ्फर की तरफ देखकर कहा - ए लोगो इस बात के गवाह बनो.

Friday, March 12, 2021

जानिए : कुरान की कौन सी 26 आयतों पर पाबन्दी लगवाना चाहते हैं काफ़िर

 वसीम रिजवी ने भारतीय सुप्रीम कोर्ट में कुरान के अंदर से 26 आयतों को निकाल देने की मांग की है. इसके लिए उसने बकायदा जनहित याचिका दायर की है, बड़े-बड़े वकीलों की जमात उसके साथ लगी है जो कोर्ट में यह साबित करेगी कि यह कुरान की आयतें भारत के लोगों यानी मुसलमान और गैर मुसलमान के बीच में लड़ाई झगड़े कराती हैं. या फिर मुसलमानों को यह सिखाती है कि वह चुपके चुपके गैर मुसलमानों के खात्मे की तैयारी करते रहें.

वसीम रिजवी ने कौन से 26 आयतों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका डाली ?

kuran ki kaun si aayton par ban lagane ki mang court me dali gayi

यहां नीचे हम आपको 24 आयतों की लिस्ट दे रहे, हमें अभी तक यह लिस्ट प्राप्त हो सकती है. गौर से पढ़िए इनको अपने मन में तय कीजिए कि वाकई में यह किसी के खिलाफ है.  

1- ''फिर, जब पवित्र महीने (रमजान का महीना) बीत जाऐं, तो 'मुश्रिको' (मूर्तिपूजको ) को जहाँ-कहीं पाओ कत्ल करो, और पकड़ो और उन्हें घेरो और हर घातकी जगह उनकी ताक में बैठो। - (कुरान 9:5 

2- ''हे 'ईमान' लाने वालो (केवल एक आल्ला को मानने वालो ) 'मुश्रिक' (मूर्तिपूजक) नापाक (अपवित्र) हैं।'' - (कुरान 9:28) 

3- ''निःसंदेह 'काफिर (गैर-मुस्लिम)तुम्हारे खुले दुश्मन हैं।'' - (कुरान 4:101).  

4- ''हे 'ईमान' लाने वालों! (मुसलमानों) उन'काफिरों' (गैर-मुस्लिमो) से लड़ो जो तुम्हारे आस पास हैं, और चाहिए कि वे तुम में सखती पायें।'' - (कुरान 9:123) 

5- ''जिन लोगों ने हमारी ''आयतों'' का इन्कार किया (इस्लाम व कुरान को मानने से इंकार) , उन्हें हम जल्द अग्नि में झोंक देंगे। जब उनकी खालें पक जाएंगी तो हम उन्हें दूसरी खालों से बदल देंगे ताकि वे यातना का रसास्वादन कर लें। निःसन्देह अल्लाह प्रभुत्वशाली तत्वदर्शी हैं'' - (कुरान 4:56). 

6- ''हे 'ईमान' लाने वालों! (मुसलमानों) अपने बापों और भाईयों को अपना मित्रमत बनाओ यदि वे ईमान की अपेक्षा 'कुफ्र' (इस्लाम को धोखा) को पसन्द करें। और तुम में से जो कोई उनसे मित्रता का नाता जोड़ेगा, तो ऐसे ही लोग जालिम होंगे'' - (कुरान 9:23) 

7- ''अल्लाह 'काफिर' लोगों (गैर-मुस्लिमो ) को मार्ग नहीं दिखाता'' - (कुरान9:37) 

8- '' ऐ ईमान (अल्ला पर यकिन) लानेवालो! तुमसे पहले जिनको किताब दी गई थी, जिन्होंने तुम्हारे मजहब को हँसी-खेल बना लिया है, उन्हें और इनकार करनेवालों को अपना मित्र न बनाओ। और अल्लाह का डर रखों यदि तुम ईमानवाले हो -  (कुरान 5:57) 

9- ''फिटकारे हुए, (मुनाफिक) मूर्तिपूजक जहां कही पाए जाऐंगे पकड़े जाएंगे और बुरी तरह कत्ल किए जाएंगे।''  (कुरान 33:61) 

10- ''(कहा जाऐगा): निश्चय ही तुम और वह जिसे तुम अल्लाह के सिवा (दूसरे भगवान को मानना) पूजते थे'जहन्नम' का ईधन हो। तुम अवश्य उसके घाट उतरोगे।'' - कुरान 21:98 

11- 'और उस से बढ़कर जालिम कौन होगा जिसे उसके 'रब' की आयतों के द्वारा चेताया जाये और फिर वह उनसे मुँह फेरले (इस्लाम छोड दे) निश्चय ही हमें ऐसे अपराधियों से बदला लेना है।'' - (कुरान 32:22) 

12- 'अल्लाह ने तुमसे बहुत सी 'गनीमतों' (लूट का माल ) में हिस्सा देने का वादा किया है जो तुम्हारे हाथ आयेंगी,'' - (कुरान 48:20) 

13- ''तो जो कुछ गनीमत (लूट का माल और औरते) तुमने हासिल किया है उसे हलाल (valid) व पाक समझकर इस्तेमाल करो  ' - (कुरान 8:69) 

14- ''हे नबी! 'काफिरों' और 'मुनाफिकों' के साथ जिहाद करो (आतंकवादी बनकर गैर-मुस्लिमो का कत्ल) और उन पर सखती करो और उनका ठिकाना 'जहन्नम' है, और बुरी जगह है जहाँ पहुँचे'' -  (कुरान 66:9) 

15- 'तो अवश्य हम 'कुफ्र' (इस्लाम को धोखा देने वालो) करने वालों को यातना का मजा चखायेंगे, और अवश्य ही हम उन्हें सबसे बुरा बदला देंगे उस कर्म का जो वे करते थे।'' - (कुरान41:27) 

16- ''यह बदला है अल्लाह के शत्रुओं का('जहन्नम' की) आग (गैर-मुस्लिमो को नर्क )। इसी में उनका सदा का घर है, इसके बदले में कि हमारी'आयतों' का इन्कार(इस्लाम व कुरान को नही अपनाना) करते थे।'' - (कुरान 41:28) 

17- ''निःसंदेह अल्लाह ने'ईमानवालों' (मुसलमानों) से उनके प्राणों और उनके मालों को इसके बदले में खरीद लिया है कि उनके लिए 'जन्नत' हैः वेअल्लाह के मार्ग में लड़ते हैं तो मारते भी हैं (इस्लाम फैलाने के लिये आतंकवादी बन कर गैर-मुस्लिमो को मारना व जबरन इस्लाम कबूलवाना) और मारे भी जाते हैं।'' - (कुरान 9:111). 

18- ''अल्लाह ने इन 'मुनाफिक' पुरुषों और मुनाफिक स्त्रियों और काफिरों से 'जहन्नम' की आग का वादा किया है जिसमें वे सदा रहेंगे। यही उन्हें बस है।अल्लाह ने उन्हें लानत की और उनके लिए स्थायी यातना है। (गैर-मुस्लिम सदा नर्क मे रहेगे )'' - (कुरान 9:68) 

19- ''हे नबी! 'ईमानवालों' (मुसलमानों) कोलड़ाई पर उभारो। यदि तुम में बीस जमेरहने वाले होंगे तो वे दो सौ पर प्रभुत्वप्राप्त करेंगे, और यदि तुम में सौ हो तो एक हजार काफिरों (गैर-मुसलमानो) पर भारी रहेंगे' - (कुरान 8:65) 

20- ''हे 'ईमान' लाने वालों! तुम यहूदियों और ईसाईयों को मित्र संबंध न बनाओ। - (कुरान 5:51).  

21- उनसे लड़ो यहाँ तक कि वे जलील होकर अपने हाथों से 'जजिया' देने लगे।'' (गैर-मुसलिमो पर जजिया tax) - (कुरान 9:29) 

22-फिर हमने उनके बीच कियामत के दिनतक के लिये वैमनस्य और द्वेष की आग भड़का दी, और अल्लाह जल्द उन्हें बतादेगा जो कुछ वे करते रहे हैं। - (कुरान 5:14) 

23- ''वे चाहते हैं कि जिस तरह से वे काफिर (गैर-मुस्लिम) हुए हैं उसी तरह से तुम भी 'काफिर' हो जाओ, फिर तुम एक जैसे हो जाओः इसीलिए उनमें से किसी को अपना साथी न बनाना जब तक वे अल्लाह की राह में हिजरत न करें, और यदि वे इससे फिर जावें तो उन्हें जहाँ कहीं पाओं पकड़ों और उनका कत्ल करो।और उनमें से किसी को साथी और सहायक मत बनाना।'' - (कुरान 4:89) 

24- ''उन (काफिरों) गैर-मुस्लिमो से लड़ों! अल्लाहतुम्हारे हाथों उन्हें यातना देगा, और उन्हें रुसवा करेगा और उनके मुकाबले में तुम्हारी सहायता करेगा, और 'ईमान' वालोंलोगों के दिल ठंडे करेगा'' - (कुरान 9:14). 

संक्षेप

अभी हमें 24 आयतों के बारे में ही जानकारी उपलब्ध हो सकी है. कुरान की वर्सेस पर पहली बार कोई मुकदमा नहीं डाला गया है पहले भी कई बार एसा हो चूका है. फिक्र ना करें ना पहले कुछ हुआ है ना अब कुछ हो पाएगा.  

Thursday, March 11, 2021

काफिरों ने कुरान को बैन करवाने के लिए हिंदुस्तान के सुप्रीम कोर्ट में डाली याचिका

 हिंदुस्तान में एक बार फिर से इस्लाम के खिलाफ साजिश तेज हो गई है और इस बार हमला किसी मुसलमान पर नहीं, सीधे-सीधे कुरान पर किया गया है. आप सोच रहे होंगे ऐसी क्या बात हो गई.

असल में हिंदुस्तान के सुप्रीम कोर्ट में याचिका डाली गई है और याचिका डालने वाले ने अदालत से गुहार लगाई है कि कुरान की 26 आयतों को कुरान से निकाल दिया जाए क्योंकि यह आयतें हिंदुस्तान के खिलाफ हैं और आतंकवाद को बढ़ावा देती है.

आपको जानकर हैरानी होगी कि याचिका उन आयतों के खिलाफ डाली गयी हैं जिसमे अल्लाह ने मुस्लिमो को काफिरों से निपटने का हुक्म दिया है.

याचिका डालने वाला काफिर चाहता है कि वह कुछ भी करें और मुसलमान उसका मुकाबला ना करें.

याचिका डालने वाले का वसीम रिज़वी 

काफिरों ने कुरान को बैन करवाने के लिए हिंदुस्तान के सुप्रीम कोर्ट के डाली याचिका

आपको सबसे ज्यादा हैरानी तब होगी जब आपको पता चलेगा कि याचिका डालने वाले का नाम वसीम रिजवी है. वसीम रिजवी शिया समुदाय का लीडर है. वसीम रिजवी तो सिर्फ मोहरा है इस याचिका को डलवाने में शिया समुदाय हिंदू बौद्ध जैन सिख और हिंदुस्तान के तमाम छोटे-बड़े फिरको की भी मिलीभगत है.

इस्लाम के बड़े-बड़े जानकारों ने पहले ही जाहिर कर दिया था की सिया और अहमदिया लोग छोटे बिरादर के गंदे लोग हैं. इसीलिए पुस्तों से शियाओं को सुन्नी मुसलमानों के साथ बैठने खाने का हक नहीं है, इसके बावजूद यह सुधरने की बजाय और बिगड़ते जा रहे हैं. इससे पहले बहुत देर हो जाए मुसलमानों को जमीनी तौर पर इनका फैसला करना होगा.

हिन्दू जैन बौद्ध सिख लोग काफ़िर है काफिरों के साथ कैसा सुलूक करना चाहिए ?

बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम, अस्सलाम वालेकुम, जैसा कि आपको पिछले लेख मुसलमान किसे कहते हैं और काफिर कौन है के अंदर बता दिया गया है काफिर किसे कहते हैं और कौन-कौन समुदाय काफिर हैं. अब यहां अल्लाह के द्वारा पैगंबर मोहम्मद को दिए गए आदेशों को फरमाएंगे जिसमें अल्लाह ने मोहम्मद से बताया है और मोहम्मद ने पूरी कायनात को बताया है कि काफिरों के साथ कैसा सलूक करना है.

कौन-कौन काफ़िर है और क्यों ? समझिए एक नजर में

Hindu Jain bauddh sikh sab kafir hain


हिंदू धर्म यानी सनातन धर्म के लोग खुले काफिर है. इसमें दो बड़े समुदाय हैं एक समुदाय निराकार ईश्वर ॐ को मानता है. यह सिर्फ वेद को ईश्वरीय ग्रंथ मानता है. और ॐ को एकमात्र ईश्वर, इस समुदाय को आर्य समाज कहते हैं. आर्य समाज इस्लाम अल्लाह और मोहम्मद की बात मानने से इनकार करता है जन्नत और जहन्नम को अंधविश्वास बताता है और तो और रोजाना पैगंबर मोहम्मद की शान में गुस्ताखी करता है कुरान पर अनाप-शनाप टिप्पणी करता है. वही दूसरा समुदाय मुशरिको का है यह लोग मूर्तियों की पूजा करते हैं नमाज नहीं करते नाहक और उसके पैगंबर को नहीं मानते.

जैन पंथ के लोग और उनकी किताबें ना तो अल्लाह पर यकीन रखते हैं और ना ही पैगंबर हजरत मोहम्मद को मानते हैं. इन लोगों का अलग ही रवैया चलता रहता है. इनका हर बाबा इनका एक पैगंबर होता है. जिसे यह लोग तीर्थंकर कहते हैं. यह भी हिंदुओं की तरह मूर्ति पूजा करते हैं.

बौद्ध पंथ के लोग नमाज नहीं करते वह उन किताबों को पढ़ते हैं जिनमें अल्लाह और मोहम्मद का कोई जिक्र नहीं है. बौद्ध समुदाय के लोग हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहो अलेही वसल्लम को पैगंबर मानने की बजाय सिद्धार्थ और बुद्ध को अपना इल्म देने वाला मानते हैं. यह लोग बुद्ध की मूर्ति बनाकर उसकी इबादत करते हैं.

सिख पंथ के लोग गुरु नानक को अपना पैगंबर मानते हैं और ओमकार को अपना खुदा. इन लोगों की तारीख इस्लाम के खिलाफ काफी गंदगी रही है. भारत की तारीख में इस्लाम की सबसे अच्छे बादशाहो ने सिक्खों के कई गुरुओं को काफिराना करने के जुर्म में मौत की सजा दी है. यह लोग भी काफिर हैं.

यहूदी और ईसाई- जब अल्लाह ने हजरत मोहम्मद साहब को अपना पैगंबर बनाकर धरती पर भेजा तमाम आवाम ने पैगंबर की बातों के पर चलना शुरू कर दिया, पर यहूदी और ईसाई जीसस और अब्राहम की बातों पर ही चल रहे हैं. जो अल्लाह ने खुद ही मोहम्मद साहब सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को पैगंबर बनाकर भेजा पूरी होगी और ईसाइयों को भी उन्हीं के अनुसार चलना चाहिए. और यकीन करना चाहिए कि पैगंबर मोहम्मद सल्लल्लाहो अलेही वसल्लम ही आखरी पैगंबर है. जब तक ईसाई और यहूदी इस बात पर ईमान नहीं लाते तब तक वह भी काफिर है.

काफिरों के साथ कैसा सलूक करना चाहिए ?

हिन्दू जैन बौद्ध सिख लोग काफ़िर है, इन काफिरों के साथ कैसा सलूक करना चाहिए, जानिए कुरान में अल्लाह ने क्या कहा है. यहां कुरान की आयतों के हवाले से काफिरों के साथ कैसा सलूक करना है यह बताया जा रहा है तुम मुसलमानों ध्यान देकर पढ़ो, और इसे हकीकत में उतारो.

''फिर, रमजान का महीना) बीत जाऐं, तो 'मुश्रिको' को जहाँ-कहीं पाओ कत्ल करो, और पकड़ो और उन्हें घेरो और हर घातकी जगह उनकी ताक में बैठो। - (कुरान 9:5)

''हे 'ईमान' लाने वालो (केवल एक आल्ला को मानने वालो ) 'मुश्रिक' नापाक (अपवित्र)हैं।'' - (कुरान 9:28)

''निःसंदेह 'काफिर (गैर-मुस्लिम)तुम्हारे खुले दुश्मन हैं।'' (कुरान 4:101).

''हे 'ईमान' लाने वालों! (मुसलमानों) उन 'काफिरों' (गैर-मुस्लिमो) से लड़ो जो तुम्हारे आस पास हैं, और चाहिए कि वे तुम में सखती पायें।'' (कुरान 9:123)

जिन लोगों ने कुरान को मानने से इनकार किया अल्लाह  उनके साथ क्या करेगा

 ''जिन लोगों ने हमारी ''आयतों'' का इन्कार किया (इस्लाम व कुरान को मानने से इंकार) , उन्हें हम जल्द अग्नि में झोंक देंगे। जब उनकी खालें पक जाएंगी तो हम उन्हें दूसरी खालों से बदल देंगे ताकि वे यातना का रसास्वादन कर लें। निःसन्देह अल्लाह प्रभुत्वशाली तत्वदर्शी हैं'' (कुरान 4:56).

वालिद और भाई काफिर बन जाए तो उनके साथ क्या करें

 ''हे 'ईमान' लाने वालों! (मुसलमानों)अपने बापों और भाईयों को अपना मित्रमत बनाओ यदि वे ईमान की अपेक्षा'कुफ्र' (इस्लाम को धोखा) को पसन्द करें। और तुम में से जो कोई उनसे मित्रता का नाता जोड़ेगा, तो ऐसे ही लोग जालिम होंगे, इसलिए उनसे नाता तोड़ दो '' - (कुरान 9:23)

 ''अल्लाह 'काफिर' लोगों (गैर-मुस्लिमो ) को मार्ग नहीं दिखाता'' - (कुरान9:37)

"ऐ ईमान (अल्ला पर यकिन) लानेवालो! तुमसे पहले जिनको किताब दी गई थी, जिन्होंने तुम्हारे धर्म को हँसी-खेल बना लिया है, उन्हें और इनकार करनेवालों को अपना मित्र न बनाओ। और अल्लाह का डर रखों यदि तुम ईमानवाले हो (कुरान5:57)

अल्लाह के सिवा किसी और को पूजने वालो और मूर्तिपूजकों के साथ कैसा सुलूक करें 

 (मुनाफिक) मूर्तिपूजक जहां कही पाए जाऐंगे पकड़े जाएंगे और बुरी तरह कत्ल किए जाएंगे।'' (कुरान 33:61)

 निश्चय ही तुम और वह जिसे तुम अल्लाह के सिवा (दूसरे भगवान को मानना) पूजते थे 'जहन्नम' का ईधन हो। तुम अवश्य उसके घाट उतरोगे।'' - कुरान 21:98

'और उस से बढ़कर जालिम कौन होगा जिसे उसके 'रब' की आयतों के द्वारा चेताया जाये और फिर वह उनसे मुँह फेरले (इस्लाम छोड दे) निश्चय ही हमें ऐसे अपराधियों से बदला लेना है।'' - (कुरान 32:22)

 यहूदियों और ईसाइयों के साथ कैसा सलूक करें

 ''हे 'ईमान' लाने वालों! तुम यहूदियों और ईसाईयों को मित्र संबंध न बनाओ। (कुरान 5:51). 

अल्लाह ने साफ तौर पर मुस्लिमों को बताया है कि काफिरों मुनाफिकों के साथ कैसा बर्ताव करना है. अगर मुसलमान मजबूर है तो कुछ समय के लिए काफिरों को दिखावे के तौर पर अपना दोस्त बना सकता है. लेकिन आखिरी तक अल्लाह के हुक्म की तामील करना जरूरी है वरना मुसलमान होकर भी काफिर की तरह जहन्नम  में जाना पड़ेगा. क्योंकि काफिरों की सिर्फ एक सजा है सजा-ए-मौत. गर सजाये मौत देना मुमकिन न हो तो अल्लाह ने और भी रस्ते बताये हैं काफिरों मुनाफिकों से निपटने के. उन पर अमल लाये.