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 ऑनलाइन लेबर कार्ड कैसे बनवाएं ? E-Shram/Labour card फ्री में बनाने का ऑनलाइन तरीका

ऑनलाइन लेबर कार्ड कैसे बनवाएं ? E-Shram/Labour card फ्री में बनाने का ऑनलाइन तरीका

मजदूरी करके असंगठित क्षेत्रों में नौकरी करके जीवन यापन करने वाले लोगों के लिए भारत सरकार ने एक योजना के तहत श्रम कार्ड लेबर कार्ड शुरू किया है. आप भी ऐसे ही क्षेत्रों में नौकरी करते हैं जहां पर प्रोविडेंट फंड और ईएसआई आज की सुविधा नहीं है तो आप लेबर कार्ड अथवा श्रम कार्ड के लिए आवेदन कर सकते हैं. आज के डेट में हम आपको लेबर कार्ड बनाने का तरीका बताएंगे.

ऑनलाइन अपना लेबर कार्ड कैसे बनाएं
labour card kaise banaye e shram card

लेबर कार्ड बनाना कोई मुश्किल कार्य नहीं है यदि कार्य करवाने जाते हैं तो वह आपसे ₹50 से लेकर ₹200 तक का शुल्क वसूली कर लेते हैं, यह कारण खुद से करेंगे तो आप मुफ्त में ही अपना श्रम कार्ड कुछ ही समय में बना सकते हैं.

लेबर कार्ड बनाने के लिए आवश्यक डाक्यूमेंट्स

लेबर कार्ड बनाने के लिए सरकार की तरफ से जारी गाइडलाइंस के अनुसार आपके पास एक आधार कार्ड और उससे कनेक्टेड मोबाइल नंबर चालू हालत में होना चाहिए साथ ही आपके नौकरी पेशा की मूलभूत जानकारी और किसी बैंक में एक बचत खाता होना आवश्यक है.

श्रम कार्ड के लिए ऑनलाइन आवेदन

 ऑनलाइन आवेदन करने के लिए सबसे पहले आपको भारत सरकार की E shram साइट पर जाना है, वेबसाइट पर जाने के लिए आप यहां दिए गए अप्लाई ऑनलाइन लिंक पर क्लिक करके भी जा सकते हैं.
अब आपके सामने एक सेल्फ रजिस्ट्रेशन फॉर्म खुलेगा
पहले कॉलम में आपको अपने आधार कार्ड से जुड़े हुए मोबाइल नंबर को भरना होगा
इसके नीचे दिए गए कैप्चा को आगे बने हुए कॉलम में भरिए
इसके बाद आपसे दो विकल्प द्वारा प्रश्नों के जवाब मांगे जाएंगे
यहां पूछा गया है कि क्या आप प्रोविडेंट फंड ऑर्गेनाइजेशन के मेंबर हैं, तो यहां पर आपको NO पर क्लिक करना है. दूसरा सवाल है क्या आप ESIC के मेंबर हैं? यहां भी आपको NO पर क्लिक करना है. इसके बाद सबमिट SUBmIT विकल्प पर क्लिक कर दीजिए.

ऐसा करने पर आपके मोबाइल नंबर पर एक ओटीपी आएगा उसको OTP को दिए गए बॉक्स में डाल कर पु नः सबमिट करना है. ऐसा करने के बाद अगले फॉर्म में आपसे आपका आधार नंबर पूछा जाएगा आधार नंबर एंटर करने पर फिर से आपकी रजिस्टरड मोबाइल नंबर पर एसएमएस आएगा, s.m.s. में दिए गए पासवर्ड को फिर से बॉक्स में डालकर वेरीफाई करना होगा. यहां से आप की प्रक्रिया लगभग आधी पूरी हो जाती है.

 आगे की प्रक्रिया में आपका आधार कार्ड ओपन हो जाता है इसमें आपका फोटो आपके पिता का नाम और आपका आधार कार्ड में अंकित पता दिखाई देता है. इसमें कुछ संशोधन करना चाहते हैं तो संशोधन कर दीजिए.
 आगे के पेज में आपसे आपके व्यवसाय के बारे में नौकरी पेशा के बारे में जानकारी मांगी जाती है.

 जानकारी में आप कैटेगरी में से अपने नौकरी पैसे का चुनाव कर सकते हैं,   इस के बाद आपको अपनी बैंक की डिटेल देनी होती है,   बैंक डिटेल्स में आपको अपने बैंक खाते का अकाउंट नंबर, बैंक शाखा का आईएफएससी कोड और साथ ही बैंक अकाउंट के प्रकार यानी खाता बचत खाता है या फिर चालू खाता जानकारी देनी है.
 इसके बाद फॉर्म कंप्लीट हो जाता है और आपको आपका श्रम कार्ड तुरंत ही मिल जाता है. इसमें आपका एक यूएएन नंबर होता है. श्रम कार्ड पूरी तरह से आधार कार्ड की तरह दिखाई देता है. आप इसका एक प्रिंट आउट निकाल कर रख सकते हैं. लेमिनेशन करवाकर उसे कार्ड की शक्ल दे सकते हैं.

 निष्कर्ष

 मित्रों इस लेख में आपको बताया गया कि किस प्रकार आप आसानी से घर बैठे ऑनलाइन लेबर कार्ड बना सकते हैं. उम्मीद करते हैं यह जानकारी आपकी समझ में आ गई होगी और आप के लिए उपयोगी सिद्ध हुई होगी. यदि आपको हमारा यह लेख पसंद आया और जानकारी अच्छी लगी हो तो हमें समर्थन जरूर दें, और इस लेख को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें.

 आर्म लाइसेंस कैसे बनवाएं? असली फीस कितनी होती है और पूरी प्रोसेस क्या है जानिए

आर्म लाइसेंस कैसे बनवाएं? असली फीस कितनी होती है और पूरी प्रोसेस क्या है जानिए

किसी भी प्रकार का असला हा रिवाल्वर पिस्टल माउजर आदि खरीदना उतना मुश्किल नहीं है परंतु कानूनी तौर पर यह हथियार रखने के लिए आर्म लाइसेंस बनवाना काफी मुश्किल है. भारत सरकार ने 2016 में आर्म लाइसेंस संशोधन के बाद लगभग हर व्यक्ति के लिए इसे सुविधाजनक बना दिया है परंतु फिर भी हर कोई व्यक्ति यह लाइसेंस नहीं बनवा सकता और इसके पीछे की बड़ी वजह यह होती है कि लोगों को लाइसेंस बनवाने की सही जानकारी नहीं होती वह भटकते रह जाते हैं और अपने पैसे बर्बाद कर बैठते हैं पर लाइसेंस नहीं बना पाते. साथ ही इस लेख में हम आपको बताएंगे आर्म लाइसेंस आसानी से किस प्रकार बनाएं?

आर्म लाइसेंस बंदूक रिवाल्वर पिस्टल रखने का लाइसेंस कैसे और किसे मिलता है?

आर्म लाइसेंस कैसे बनवाएं इससे पहले यह जानना जरूरी है यह लाइसेंस कैसे मिलता है? और कौन-कौन व्यक्ति लाइसेंस के लिए आवेदन कर सकते हैं. आपको जानकारी जरूर होगी कि ड्राइविंग लाइसेंस बनवाना भी कोई आसान काम नहीं है यहां तो बात गन लाइसेंस की है तो यह भी और ज्यादा कठिन होगा.

कानून के अनुसार गन लाइसेंस रखने के लिए आपके पास ठोस वजह होनी चाहिए, जैसे कि आपकी संपत्ति की सुरक्षा के लिए, आत्मरक्षा के लिए अथवा आपकी हैसियत इतनी है कि आपको कभी भी बंदूक इस्तेमाल करने की जरूरत पड़ सकती है. यह तीन मुख्य कारण आर्म लाइसेंस बनवाने में उपयोग होते हैं.

यदि आप सिर्फ शौक पूरे करने के लिए अपने पास कोई रिवाल्वर या पिस्टल खरीदना चाहते हैं तो आपको हैसियत सिद्ध करने की जरूरत पड़ती है और इसके लिए हैसियत प्रमाण पत्र बनता है.

आपके ऊपर जानलेवा हमला हुआ है इसलिए अपनी आत्मरक्षा के लिए लाइसेंस के लिए आवेदन करना चाहते हैं तो आपको आपके ऊपर भूतकाल में हुए हमलों के मुकदमे की प्रतियां लाइसेंस के लिए आवेदन करते समय प्रस्तुत करनी होती है, जिनके आधार पर जिला न्यायाधीश फैसला लेते हुए आपके लाइसेंस आवेदन को मंजूरी देते हैं.

यदि आप कई सारे खेतों के मालिक हैं जिनमें ऐसी फसल होती है जिसे जंगली सूअर जैसे खतरनाक जानवरों से खतरा है, ऐसी स्थिति में भी आप अपने खेतों की रक्षा के लिए आर्म लाइसेंस का आवेदन डाल सकते हैं इस स्थिति में आपको वैसे ही बंदूक खरीदने का लाइसेंस दिया जाएगा, आप पिस्टल रिवाल्वर या माउजर नहीं खरीद सकते.

आर्म लाइसेंस बंदूक का लाइसेंस कैसे बनता है?

भारत सरकार का गृह मंत्रालय आर्म लाइसेंस को मंजूरी देता है फिर चाहे वह केंद्रीय गृह मंत्रालय हो या फिर आपके राज्य का गृह मंत्रालय. गृह मंत्रालय तक आपके द्वारा हथियार रखने के लाइसेंस बनवाने का अनुरोध आपके डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट के द्वारा भेजा जाता है.

आर्म लाइसेंस की प्रक्रिया सबसे पहले आपके जिला न्यायालय से ही शुरू होती है, आवेदन करता लाइसेंस का फॉर्म भरकर उसे दो प्रतियों में अपने दस्तावेजों की फोटो कॉपी सम्मिलित फाइल तैयार करके जिला न्यायालय में बने शस्त्र अनुभाग के बाबू को दोनों फाइल जमा कर देता है. इसके बाद शुरू हो जाती है आवेदन की जांच की प्रक्रिया. अब आपको बताते हैं कि जब आप आवेदन करेंगे तब आपका आर्म लाइसेंस किस प्रक्रिया से बनेगा.

आर्म लाइसेंस के लिए ऑनलाइन अथवा ऑफलाइन आवेदन करने की प्रक्रिया

भारत सरकार द्वारा आर्म लाइसेंस के आवेदन हेतु ऑनलाइन वेब पोर्टल भी बना दिया गया है, अब आप ऑनलाइन भी आवेदन कर सकते हैं. आवेदन चाहे ऑफलाइन किया जाए अथवा ऑनलाइन आगे की प्रक्रिया एक जैसी ही रहती है. परंतु ऑनलाइन किए गए आवेदन कुछ ज्यादा ही कारगर रहते हैं. और इसमें भागदौड़ कम होती है.

परंतु यदि आप ऑफलाइन आवेदन करना चाहते हैं तो आपको जिला न्यायालय जाकर वहां पर नए लाइसेंस हेतु आर्म लाइसेंस का फॉर्म a1 खरीदना होगा जिसकी कीमत करीब ₹200 होती है. वही ऑनलाइन आवेदन करने पर कोई भी फीस नहीं पड़ती. ऑनलाइन आवेदन आप किसी भी इंटरनेट के जानकार व्यक्ति से करवा सकते हैं या स्वयं भी कर सकते हैं.

आवेदन करने के लिए पहले आप भारत सरकार की एन डी ए एल साइट पर जाकर के अप्लाई ऑनलाइन पर क्लिक करें और अपना राज्य तथा जिला चुनकर आगे का फॉर्म भरे. फॉर्म भरने पर आपका एक रिफरेंस नंबर जनरेट हो जाता है, रेफरेंस नंबर से आप अपने किए गए आवेदन की स्थिति जान सकते हैं.

ऑनलाइन आवेदन करने के बाद आवेदन फॉर्म का प्रिंट आउट निकाल लीजिए और इसकी तीन प्रतियां बनाएं. 3 प्रतियों को तीन अलग-अलग रिकॉर्ड फाइल में लगा लीजिए. और इसी फाइल में आपको अपने कुछ महत्वपूर्ण डॉक्यूमेंट शामिल करने होंगे.

  1. आपका जन्म प्रमाण पत्र
  2. आपका स्वास्थ्य प्रमाण पत्र
  3. आपका आधार कार्ड
  4. वोटर आईडी कार्ड
  5. आपके दो पड़ोसियों का आधार कार्ड वह आपके पक्ष में दिया गया उनका हलफनामा
  6. हाई स्कूल इंटर की मार्कशीट की फोटो कॉपी

ऊपर बताया गया सभी डाक्यूमेंट्स की 3 प्रतियां फोटो कॉपी करा कर के तीनों फाइल में लगा लीजिए. और उन्हें अपने जिला के डीएम ऑफिस में ले जाइए जहां पर बने हुए शस्त्र अनुभाग में आपको यह तीनों फाइल जमा करनी है. आमतौर पर शुक्रवार के दिन यह फाइलें जमा होती हैं, पहले जमा करने से पहले इनमें से लगवाना ना भूले इसकी जानकारी आपको सत्र अनुभाग में ही दे दी जाएगी.

जब आप असलाहा बाबू के पास अपनी फाइलें जमा कर देते हैं वह एक फाइल एसडीएम के पास भेजता है और दूसरी फाइल कमिश्नर के पास तथा तीसरी फाइल अपने पास सुरक्षित रखता है. एसडीएम के पास पहुंची फाइल आपके तहसील में आती है जहां से तहसीलदार आपके क्षेत्र के संबंधित लेखपाल को वह फाइल देता है और आपका लेखपाल आपकी हैसियत का मुआयना करके रिपोर्ट तैयार करके फाइल में सम्मिलित करके उसे वापस डीएम ऑफिस के शस्त्र अनुभाग में भेज देता है, भ्रष्टाचार के चलते तहसील से तैयार होने वाली इस रिपोर्ट को आपके पक्ष में करने की एवज में आपसे पैसे की डिमांड भी होती है, वरना सब कुछ सही होने के बाद भी तहसील से खराब रिपोर्ट ही भेजी जाती है.

दूसरी फाइल जो कमिश्नर के पास आई होती है कमिश्नर के द्वारा उसे आपके नजदीकी थाने में भेजा जाता है जहां से कुछ पुलिस वाले नियुक्त किए जाते हैं जो आपकी जांच करते हैं तथा आपके चरित्र और आपके निवास की जांच करके यह रिपोर्ट तैयार करते हैं कि आप और आपका निवास हथियार रखने के काबिल है. यहां भी पैसे का थोड़ा खेल हो जाए तो काम जल्दी हो जाता है. वरना गड़बड़ हो जाता है.

उतना मुश्किल नहीं होता जितना मुश्किल तब होता है जब आप की फाइल डीएम के पास पहुंचती है, भले ही सारी रिपोर्ट आप के पक्ष में हो परंतु डीएम फिर भी लाइसेंस का आवेदन स्वीकार नहीं करता. और यदि करता भी है तो जबरन आपके द्वारा रेड क्रॉस सोसाइटी में 50000 या फिर 80000 का डोनेशन देने की रसीद भर देता है अब आपको लाइसेंस लेने के लिए यह डोनेशन देना जरूरी पड़ जाता है. कानूनी रूप से डीएमके द्वारा की जाने वाली हरकत पूरी तरह से गैरकानूनी है डोनेशन देना व्यक्ति की मर्जी पर होता है और आमतौर पर ₹500 डोनेशन में दिए जाते हैं.

इस प्रक्रिया से गुजरने के बाद ही आप का लाइसेंस बनता है, यदि आप लाइसेंस बनवाना चाहते हैं तो जेब मजबूत रखें.


मोहम्मद साहब का करिश्मा : रसूल अल्लाह के एक इशारे पर जब हुए चाँद के दो टुकड़े

मोहम्मद साहब का करिश्मा : रसूल अल्लाह के एक इशारे पर जब हुए चाँद के दो टुकड़े

पैगंबर हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की तारीफ कुछ भी कहा जाए वह कम पड़ जाएगा. मोहम्मद साहब पूरी कायनात में सबसे अनोखे इंसान थे जिसे अल्लाह ने नेक मकसद के लिए चुना था. नबी के बारे में तरह-तरह के रोचक किस्से कहानियों का समंदर बना पड़ा है कहानियां कम नहीं होंगी इंसान कम पड़ जाएंगे. ऐसा ही एक ऐसा है जो हजरत मोहम्मद साहब ने बातों बातों में ही चांद के दो टुकड़े कर दिए थे. आइए जानी उस कहानी के बारे में.

चांद के दो टुकड़े करने की करिश्मा की कहानी

Nabi muhammad ne chand ke do tukde kar diye

 जब अल्लाह ने हजरत मोहम्मद को बताया कि मैं तुम्हें अपना पैगाम इंसानों तक पहुंचाने के लिए पैगंबर बनाता हूं. और यह बात जब मोहम्मद साहब ने मक्का शरीफ के लोगों को बताई तो उसमें से अनेकों लोगों ने इस बात पर यकीन करने से इंकार कर दिया. उन्होंने सवालिया निशान लगाते हुए कहा "अगर तुम सच्चे नबी हो तो चांद के दो टुकड़े करके दिखाओ."
लोगों के द्वारा ऐसी बात बोले जाने पर हजरत मोहम्मद साहब मुस्कुराए उन्होंने कहा अगर मैं ऐसा कर देता हूं तब तो तुम यकीन लाओगे ? ऐसा कहकर नबी हजरत मोहम्मद ने आसमान की ओर देखा और अल्लाह को याद किया. अल्लाह ने देखा कि हजरत मोहम्मद साहब की नबूवत को साबित करने के लिए करिश्मा करने की जरूरत है. तो जैसे ही हजरत मोहम्मद साहब ने अल्लाह को याद करके आसमान में दिखाई दे रहे चांद की तरफ ऊँगली की चांद के दो टुकड़े हो गए.

देखने वाले लोगों को अपनी आंखों पर यकीन नहीं हो रहा था, आगे क्या हुआ हदीस की रोशनी से आपको बताते हैं.

बुखारी शरीफ की हदीस नंबर 3637 और मुस्लिम शरीफ की हदीस नंबर 7076 में कहा गया है -

हज़रत अनस रजियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि मक्का शरीफ के कुफ्फार ने रसुल अल्लाह (स.) से सवाल किया कि आप अगर नबी है तो अपनी नबुव्वत की कोई निशानी दिखायें हमें मोजिजा दिखायें ! तो रसुल अल्लाह (स.) ने चांद की तरफ अपनी उंगली से इशारा करके चांद के दो टुकडे कर के दिखाये.

सहीह बुखारी किताब 54 हदीस नंबर 830 इसी किस्से का जिक्र किया गया है-

हज़रत इब्ने मसऊद रजियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसुल अल्लाह (स.) के जमाने में चांद के दो टूकडे हुए एक पहाड के ऊपर था और एक नीचे तो रसुल अल्लाह (स.) ने फरमाया ए लोगों इस पर गवाह रहो.

दोनों हदीसों का मकसद एक ही है यह दोनों एक ही करिश्मा का जिक्र कर रही है. - जब काफिरों ने नबी की नबूवत पर सवाल उठाया और कोई करिश्मा दिखाने को कहा उन नबी ने चाँद की तरफ इशारा करके उसके दो टुकड़े कर दिए . जब रसूल अल्लाह ने चांद के दो टुकड़े किए तो टुकड़े ऐसे हुए, एक टुकड़ा पहाड़ के ऊपर पड़ा था तो दूसरा पहाड़ के नीचे. रसूल अल्लाह ने कुफ्फर की तरफ देखकर कहा - ए लोगो इस बात के गवाह बनो.

बुद्ध का जन्म कैसे हुआ था ? क्या है बुद्ध उर्फ सिद्धार्थ की पैदाईस की हकीकत

बुद्ध का जन्म कैसे हुआ था ? क्या है बुद्ध उर्फ सिद्धार्थ की पैदाईस की हकीकत

इंसान जब शैतान के साये में आ जाता है तो कुफ्र में चला जाता है और काफिराना हरकते करने लगता है। उसकी इन्ही हरकतों से अल्लाह उसपर अज़ाब लाता है। बुद्ध के मामले में भी ऐसा ही हुआ था।

कौन था बुद्ध
असल मे बुद्ध जैसा कोई नही था, एक शख्स जिसका नाम सिद्धार्थ था उसने खुद ही खुद का नाम बदलकर बुद्ध में तब्दील कर दिया था।

सिद्धार्थ बचपन से ही मूर्ख था, इतना मूर्ख की उसका घोड़ागाड़ी चलाने वाला गुलाम चन्ना उसके सामने अक्लमंद साबित होता था।

लेकिन धीरे धीरे सिद्धार्थ को समझ आती गयी कि वो आम इंसान नही है बल्कि शैतान का बीज है।

शैतान का बन्दा अपने मुकाम पर
 शैतान को हमेशा से ही अल्लाह के बंदों पर राज करने और उन्हें अपना नुमाइंदा बनाने अपने इशारे पर नचाने की सनक लगी हुई है।

सिद्धार्थ ने भी वही किया इसने सबसे पहले हिन्दू धर्म की किताबों से एक नाम चुराया और खुद को उसका अवतार घोषित किया। आपको बता दें कि हिंदुओं में भगवान का एक नाम विष्णु है और उस विष्णु के कई वतार है जिनमे से एक का नाम बुद्ध था।

लोगो ने इसे बुद्ध समझकर उसकी बातें मन्ना शुरू कर दिया। और यही से इस काफिर ने भी कुफ्र फैलाना शुरू किया।

इसका मानना था कि दुनिया किसी ने नही बनाई, इस अन्धविश्वासी की माने तो दुनिया अपने आप जादू से बन गई 😂

इस काफिर ने इस जहान में सबसे ज्यादा दीन को नुकसान पहुचाया है। अब सवाल ये है कि अनेको काफिर है इस दुनिया मे लेकिन अन्धविश्वास फैलाने में खुद को सबसे ताकतवर घोषित करने में ये काफिर बुद्ध ही सफल क्यों हुआ।

शैतान का बच्चा बुद्ध
चूंकि बुद्ध आम इंसान नही बल्कि शैतान का औलाद था। इसकी अम्मी महामाया जिसके शौहर का नाम सुद्दोधन था। इन दोनों के कोई औलाद नही हुई थी। एक रात महामाया के सपने में शैतान हाथी का भेष बनाकर आया, और महामाया के साथ जोर आजमाइश करते हुए खूब जिना किया, और उसकी शैतानी ताकत के चलते दूसरे दिन ही महामाया ने एक बच्चे को जन्म दे दिया।

अब आप समझ ही गए होंगे सिद्धार्थ इतना ताकतवर क्यों था।

सिद्धार्थ का असली बाप यानी शैतानो का शैतान हाथी की शक्ल में आया था इसलिए सिद्धार्थ ने अपने गिरोह में हाथी को काफी ऊंचा ओहदा दिया।
 तलाक क्या है ?  तलाक किसने बनाई ? जानिए Triple Talaq तलाक-ए-बिद्द्त  की हकीकत कुरान से

तलाक क्या है ? तलाक किसने बनाई ? जानिए Triple Talaq तलाक-ए-बिद्द्त की हकीकत कुरान से

तलाक एक ऐसा शब्द है जो रिश्तो को तोड़ता है यह एक अरबी शब्द है , इस्लाम में इस शब्द से जुड़ी है एक प्रथा है जिसे आम भाषा में तीन तलाक, अंग्रेजी में ट्रिपल तलाक और अरबी में तलाक-ए-बिद्द्त के नाम से जाना जाता है.

तलाक, ट्रिपल तलाक अथवा तलाक-ए-बिद्द्त क्या है ?

Talaq kya hai talaq kisne banayi janiye talak ke bare me

तलाक एक अरबी शब्द है जिसे ट्रिपल तलाक और तलाक-ए-बिद्द्त भी कहा जाता है. अल कुरान सूरह अल बकरा की आयत 229 और 230 में तीन तलाक और हलाला के बारे में बताया गया है. हलाला क्या है यह हम आपको पहले ही बता चुके हैं. आयत 229 और 230 के अनुसार यदि कोई शख्स अपनी औरत से तीन बार तलाक तलाक तलाक बोल देता है तो दोनों का निकाह खत्म हो जाता है. अब वह औरत उस आदमी के साथ घर में रहने की हकदार नहीं है. अब उसे अपने मायके लौट जाना होगा. तलाक की यह प्रक्रिया निकाह को खत्म करने के लिए बनाई गई है.

तलाक किसने बनाई ?

दुनिया में तलाक का पहला जिक्र कुरान में आया है कुरान पैगंबर हजरत मोहम्मद के द्वारा कहीं गई थी और पैगंबर हजरत मोहम्मद के अनुसार यह सब बातें जो कुछ भी कुरान में लिखी हैं अल्लाह ने हजरत मोहम्मद साहब तक भेजी थी. यानी कि ट्रिपल तलाक अल्लाह और पैगंबर हजरत मोहम्मद ने बनाई.

तलाक कौन दे सकता है ? क्या मुसलमान औरत अपने शौहर को तलाक दे सकती है ?

यह सवाल अक्सर मुसलमानों के मन में उठता रहता है. कुरान में जो जिक्र किया गया है उसके अनुसार आदमी अपनी औरत को तीन बार तलाक बोलकर तलाक दे सकता है. पर कुरान में ऐसा कोई भी नियम नहीं है जिसके अनुसार औरत अपने आदमी को तलाक दे सके. तलाक देने का हक सिर्फ आदमियों को होता है औरतों को नहीं.

तलाक की जरूरत क्या है ?

कोई आदमी किसलिए निकाह करता है ताकि वह औरत के साथ सिर्फ मजे ही नहीं बल्कि जायज  बच्चे पैदा कर सके और दीनी दुनिया में तरक्की करते हुए जन्नत जा सके. पर जब जिस औरतके साथ उसका निकाह हुआ हो उसके साथ उसे वो मज़े न मिले जिसकी वो उम्मीद किये था,  ऐसे में जब मजा किरकिरा होने लगे या फिर उस औरत से मन भर जाए या फिर पुरानी औरत को छोड़कर नया निकाह करने की मर्जी हो तो ऐसे में अल्लाह और पैगंबर मोहम्मद पर यकीन करने वाले यानी मुसलमान के पास औरत को तलाक देने का अधिकार है.

इस्लाम में हलाला क्या है ? अल्लाह ने निकाह हलाला कुरान में कहा फरमाया है ?

इस्लाम में हलाला क्या है ? अल्लाह ने निकाह हलाला कुरान में कहा फरमाया है ?

हलाला - यह एक अरबी शब्द है इसके मायने हैं काबिल बनाना या फिर इस्लामिक कानून के मुताबिक बनाना, यह सब शरीयत का हिस्सा है. हलाला एक प्राचीन प्रथा है इस्लामिक रस्मो रिवाज है जिस पर गैर मुसलमानों और बड़े-बड़े एक्टिविस्ट द्वारा कुछ ज्यादा ही सवाल उठाए गए. जिनकी वजह से इस्लामिक विद्वान मौलाना सूफी इमाम आदि लोग इतना डर जाते हैं कितना शर्मसार हो जाते हैं की इस्लामिक रिवाज को नकारने लगते हैं और कहने लगते हैं कि ऐसा इस्लाम में है ही नहीं. जबकि इस रिवाज में शर्मसार होने लायक कुछ है ही नहीं आज हम आपको इस इस्लामिक रिवाज की हकीकत बताएंगे.

इस्लाम में हलाला क्या है पूरी जानकारी

NIkaah halala kya hai islam me

असल में हलाला कोई आम रस्मो रिवाज नहीं बल्कि एक निकाह है. निकाह हलाला की जरूरत केवल तब होती है जब किसी मियां बीवी का तलाक हो गया हो और वो दोनों वापिस साथ बीबी शौहर बनके रहना चाहते हो.

ऐसे में कुरान सूरह अल बकरा की आयत 230 में हलाला के बारे में फरमाया गया है 

(२: २३०) तब, अगर वह उसे तलाक दे देता है (तीसरी बार, तलाक दो बार उच्चारण करने के बाद), वह उसके लिए तब तक दुबारा निकाह के जायज नहीं होगी जब तक कि वह अपने लिए दूसरा पुरुष चुन नहीं लेती है, और जब वह दूसरा मर्द भी उसे तलाक दे देता है। इसके बाद यदि दोनों एक दूसरे के पास लौट आते हैं, तो कोई दोष नहीं, बशर्ते उन्हें लगता है कि वे अल्लाह द्वारा निर्धारित सीमा के भीतर रखने में सक्षम होंगे। ये अल्लाह की सीमाएं हैं जो वह उन लोगों को स्पष्ट करता है जिन्हें ज्ञान है (उन सीमाओं का उल्लंघन करने के परिणामों के बारे में)।

इस आयत में साफ-साफ फरमाया गया है- अगर किसी औरत का शौहर उसे तीन तलाक दे देता है, तब दोनों का साथ रहना नाजायज हो जाता है. तब वह शख्स उस औरत से दोबारा निकाह तब ही कर पाएगा जब वह औरत किसी दूसरे मर्द से निकाह कर ले और निकाह के बाद वह दूसरा मर्द उसे तलाक दे दे. दूसरे निगाह में भी तलाक होने के बाद ही वह औरत अपने पुराने सोहर के साथ निकाह कर सकती है. प्रक्रिया को हलाला कहते हैं.

हलाला में किस चीज का ध्यान रखना पड़ता है ?

निकाह हलाला करने में कुछ चीजों का विशेष ध्यान रखना पड़ता है, जैसे कि निकाह हलाला केवल दिखावटी ना किया जाए. यानी कि दिखावे के लिए किसी मर्द के साथ निकाह  पढ़ा दिया गया और फिर बिना हमबिस्तरी किए  तलाक करवा दी गई. और इसके बाद मियां बीवी ने वापस आपस में निकाह कर लिया. इस तरह से किया गया खयाली फर्जी दिखावटी या काल्पनिक निकाह हलाला नहीं कहलाता बल्कि हराम है. अली, इब्न मसऊद, अबू हुरैरा और 'उकबाह इब्न' अमीर से प्रसारित एक परंपरा के अनुसार, पैगंबर ने फर्जी रूप से हलाला करने की व्यवस्था करने वालों के साथ-साथ उन लोगों पर भी अपना शाप दिया, जो हलाला जैसे पाक निकाह को काल्पनिक रूप से करना चाहते थे. 

हलाला निकाह एकदम असल का होना चाहिए. यानी की औरत  को किसी शख्स से निकाह करना होगा और उसके साथ बेगम की तरह हमबिस्तर होना हो जब तक वह दूसरा शख्स जिसके साथ लिखा हुआ है चाहे. तब तक उसकी  बेगम बनकर रहना होगा. इसके बाद यदि वो सख्स अपनी मर्जी से औरत को तीन बारी तलाक बोल देता है तो वो औरत वापिस अपने पुराने शौहर के साथ निकाह करने करने के काबिल बन जाती है.

हलाला जायज है या नाजायज 

 हलाला किसी इंसान की बनाई निकाह की रसम नहीं है. अल्लाह द्वारा बताया गया एक निकाह  है. इसलिए इसमें सवाल उठाने की बात ही नहीं आती. कुरान में लिखा एक एक शब्द पुरे ईमान से मानने वाला ही मुसलमान होता है और जो कोई कुरान पर ही सवाल उठाये या उसमे फरमाए गये निकाह हलाला को गलत कुप्रथा व् नाजायज ठहराए तो वो सीधे तौर पर इस्लाम को धोखा देने वाला मुनाफिक है और कुरान को नकारने वाला काफ़िर है. हलाला पूरी तरह से जायज है.
जानिए : कुरान की कौन सी 26 आयतों पर पाबन्दी लगवाना चाहते हैं काफ़िर

जानिए : कुरान की कौन सी 26 आयतों पर पाबन्दी लगवाना चाहते हैं काफ़िर

 वसीम रिजवी ने भारतीय सुप्रीम कोर्ट में कुरान के अंदर से 26 आयतों को निकाल देने की मांग की है. इसके लिए उसने बकायदा जनहित याचिका दायर की है, बड़े-बड़े वकीलों की जमात उसके साथ लगी है जो कोर्ट में यह साबित करेगी कि यह कुरान की आयतें भारत के लोगों यानी मुसलमान और गैर मुसलमान के बीच में लड़ाई झगड़े कराती हैं. या फिर मुसलमानों को यह सिखाती है कि वह चुपके चुपके गैर मुसलमानों के खात्मे की तैयारी करते रहें.

वसीम रिजवी ने कौन से 26 आयतों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका डाली ?

kuran ki kaun si aayton par ban lagane ki mang court me dali gayi

यहां नीचे हम आपको 24 आयतों की लिस्ट दे रहे, हमें अभी तक यह लिस्ट प्राप्त हो सकती है. गौर से पढ़िए इनको अपने मन में तय कीजिए कि वाकई में यह किसी के खिलाफ है.  

1- ''फिर, जब पवित्र महीने (रमजान का महीना) बीत जाऐं, तो 'मुश्रिको' (मूर्तिपूजको ) को जहाँ-कहीं पाओ कत्ल करो, और पकड़ो और उन्हें घेरो और हर घातकी जगह उनकी ताक में बैठो। - (कुरान 9:5 

2- ''हे 'ईमान' लाने वालो (केवल एक आल्ला को मानने वालो ) 'मुश्रिक' (मूर्तिपूजक) नापाक (अपवित्र) हैं।'' - (कुरान 9:28) 

3- ''निःसंदेह 'काफिर (गैर-मुस्लिम)तुम्हारे खुले दुश्मन हैं।'' - (कुरान 4:101).  

4- ''हे 'ईमान' लाने वालों! (मुसलमानों) उन'काफिरों' (गैर-मुस्लिमो) से लड़ो जो तुम्हारे आस पास हैं, और चाहिए कि वे तुम में सखती पायें।'' - (कुरान 9:123) 

5- ''जिन लोगों ने हमारी ''आयतों'' का इन्कार किया (इस्लाम व कुरान को मानने से इंकार) , उन्हें हम जल्द अग्नि में झोंक देंगे। जब उनकी खालें पक जाएंगी तो हम उन्हें दूसरी खालों से बदल देंगे ताकि वे यातना का रसास्वादन कर लें। निःसन्देह अल्लाह प्रभुत्वशाली तत्वदर्शी हैं'' - (कुरान 4:56). 

6- ''हे 'ईमान' लाने वालों! (मुसलमानों) अपने बापों और भाईयों को अपना मित्रमत बनाओ यदि वे ईमान की अपेक्षा 'कुफ्र' (इस्लाम को धोखा) को पसन्द करें। और तुम में से जो कोई उनसे मित्रता का नाता जोड़ेगा, तो ऐसे ही लोग जालिम होंगे'' - (कुरान 9:23) 

7- ''अल्लाह 'काफिर' लोगों (गैर-मुस्लिमो ) को मार्ग नहीं दिखाता'' - (कुरान9:37) 

8- '' ऐ ईमान (अल्ला पर यकिन) लानेवालो! तुमसे पहले जिनको किताब दी गई थी, जिन्होंने तुम्हारे मजहब को हँसी-खेल बना लिया है, उन्हें और इनकार करनेवालों को अपना मित्र न बनाओ। और अल्लाह का डर रखों यदि तुम ईमानवाले हो -  (कुरान 5:57) 

9- ''फिटकारे हुए, (मुनाफिक) मूर्तिपूजक जहां कही पाए जाऐंगे पकड़े जाएंगे और बुरी तरह कत्ल किए जाएंगे।''  (कुरान 33:61) 

10- ''(कहा जाऐगा): निश्चय ही तुम और वह जिसे तुम अल्लाह के सिवा (दूसरे भगवान को मानना) पूजते थे'जहन्नम' का ईधन हो। तुम अवश्य उसके घाट उतरोगे।'' - कुरान 21:98 

11- 'और उस से बढ़कर जालिम कौन होगा जिसे उसके 'रब' की आयतों के द्वारा चेताया जाये और फिर वह उनसे मुँह फेरले (इस्लाम छोड दे) निश्चय ही हमें ऐसे अपराधियों से बदला लेना है।'' - (कुरान 32:22) 

12- 'अल्लाह ने तुमसे बहुत सी 'गनीमतों' (लूट का माल ) में हिस्सा देने का वादा किया है जो तुम्हारे हाथ आयेंगी,'' - (कुरान 48:20) 

13- ''तो जो कुछ गनीमत (लूट का माल और औरते) तुमने हासिल किया है उसे हलाल (valid) व पाक समझकर इस्तेमाल करो  ' - (कुरान 8:69) 

14- ''हे नबी! 'काफिरों' और 'मुनाफिकों' के साथ जिहाद करो (आतंकवादी बनकर गैर-मुस्लिमो का कत्ल) और उन पर सखती करो और उनका ठिकाना 'जहन्नम' है, और बुरी जगह है जहाँ पहुँचे'' -  (कुरान 66:9) 

15- 'तो अवश्य हम 'कुफ्र' (इस्लाम को धोखा देने वालो) करने वालों को यातना का मजा चखायेंगे, और अवश्य ही हम उन्हें सबसे बुरा बदला देंगे उस कर्म का जो वे करते थे।'' - (कुरान41:27) 

16- ''यह बदला है अल्लाह के शत्रुओं का('जहन्नम' की) आग (गैर-मुस्लिमो को नर्क )। इसी में उनका सदा का घर है, इसके बदले में कि हमारी'आयतों' का इन्कार(इस्लाम व कुरान को नही अपनाना) करते थे।'' - (कुरान 41:28) 

17- ''निःसंदेह अल्लाह ने'ईमानवालों' (मुसलमानों) से उनके प्राणों और उनके मालों को इसके बदले में खरीद लिया है कि उनके लिए 'जन्नत' हैः वेअल्लाह के मार्ग में लड़ते हैं तो मारते भी हैं (इस्लाम फैलाने के लिये आतंकवादी बन कर गैर-मुस्लिमो को मारना व जबरन इस्लाम कबूलवाना) और मारे भी जाते हैं।'' - (कुरान 9:111). 

18- ''अल्लाह ने इन 'मुनाफिक' पुरुषों और मुनाफिक स्त्रियों और काफिरों से 'जहन्नम' की आग का वादा किया है जिसमें वे सदा रहेंगे। यही उन्हें बस है।अल्लाह ने उन्हें लानत की और उनके लिए स्थायी यातना है। (गैर-मुस्लिम सदा नर्क मे रहेगे )'' - (कुरान 9:68) 

19- ''हे नबी! 'ईमानवालों' (मुसलमानों) कोलड़ाई पर उभारो। यदि तुम में बीस जमेरहने वाले होंगे तो वे दो सौ पर प्रभुत्वप्राप्त करेंगे, और यदि तुम में सौ हो तो एक हजार काफिरों (गैर-मुसलमानो) पर भारी रहेंगे' - (कुरान 8:65) 

20- ''हे 'ईमान' लाने वालों! तुम यहूदियों और ईसाईयों को मित्र संबंध न बनाओ। - (कुरान 5:51).  

21- उनसे लड़ो यहाँ तक कि वे जलील होकर अपने हाथों से 'जजिया' देने लगे।'' (गैर-मुसलिमो पर जजिया tax) - (कुरान 9:29) 

22-फिर हमने उनके बीच कियामत के दिनतक के लिये वैमनस्य और द्वेष की आग भड़का दी, और अल्लाह जल्द उन्हें बतादेगा जो कुछ वे करते रहे हैं। - (कुरान 5:14) 

23- ''वे चाहते हैं कि जिस तरह से वे काफिर (गैर-मुस्लिम) हुए हैं उसी तरह से तुम भी 'काफिर' हो जाओ, फिर तुम एक जैसे हो जाओः इसीलिए उनमें से किसी को अपना साथी न बनाना जब तक वे अल्लाह की राह में हिजरत न करें, और यदि वे इससे फिर जावें तो उन्हें जहाँ कहीं पाओं पकड़ों और उनका कत्ल करो।और उनमें से किसी को साथी और सहायक मत बनाना।'' - (कुरान 4:89) 

24- ''उन (काफिरों) गैर-मुस्लिमो से लड़ों! अल्लाहतुम्हारे हाथों उन्हें यातना देगा, और उन्हें रुसवा करेगा और उनके मुकाबले में तुम्हारी सहायता करेगा, और 'ईमान' वालोंलोगों के दिल ठंडे करेगा'' - (कुरान 9:14). 

संक्षेप

अभी हमें 24 आयतों के बारे में ही जानकारी उपलब्ध हो सकी है. कुरान की वर्सेस पर पहली बार कोई मुकदमा नहीं डाला गया है पहले भी कई बार एसा हो चूका है. फिक्र ना करें ना पहले कुछ हुआ है ना अब कुछ हो पाएगा.  

हिन्दू जैन बौद्ध सिख लोग काफ़िर है  काफिरों के साथ कैसा सुलूक करना चाहिए ?

हिन्दू जैन बौद्ध सिख लोग काफ़िर है काफिरों के साथ कैसा सुलूक करना चाहिए ?

बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम, अस्सलाम वालेकुम, जैसा कि आपको पिछले लेख मुसलमान किसे कहते हैं और काफिर कौन है के अंदर बता दिया गया है काफिर किसे कहते हैं और कौन-कौन समुदाय काफिर हैं. अब यहां अल्लाह के द्वारा पैगंबर मोहम्मद को दिए गए आदेशों को फरमाएंगे जिसमें अल्लाह ने मोहम्मद से बताया है और मोहम्मद ने पूरी कायनात को बताया है कि काफिरों के साथ कैसा सलूक करना है.

कौन-कौन काफ़िर है और क्यों ? समझिए एक नजर में

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हिंदू धर्म यानी सनातन धर्म के लोग खुले काफिर है. इसमें दो बड़े समुदाय हैं एक समुदाय निराकार ईश्वर ॐ को मानता है. यह सिर्फ वेद को ईश्वरीय ग्रंथ मानता है. और ॐ को एकमात्र ईश्वर, इस समुदाय को आर्य समाज कहते हैं. आर्य समाज इस्लाम अल्लाह और मोहम्मद की बात मानने से इनकार करता है जन्नत और जहन्नम को अंधविश्वास बताता है और तो और रोजाना पैगंबर मोहम्मद की शान में गुस्ताखी करता है कुरान पर अनाप-शनाप टिप्पणी करता है. वही दूसरा समुदाय मुशरिको का है यह लोग मूर्तियों की पूजा करते हैं नमाज नहीं करते नाहक और उसके पैगंबर को नहीं मानते.

जैन पंथ के लोग और उनकी किताबें ना तो अल्लाह पर यकीन रखते हैं और ना ही पैगंबर हजरत मोहम्मद को मानते हैं. इन लोगों का अलग ही रवैया चलता रहता है. इनका हर बाबा इनका एक पैगंबर होता है. जिसे यह लोग तीर्थंकर कहते हैं. यह भी हिंदुओं की तरह मूर्ति पूजा करते हैं.

बौद्ध पंथ के लोग नमाज नहीं करते वह उन किताबों को पढ़ते हैं जिनमें अल्लाह और मोहम्मद का कोई जिक्र नहीं है. बौद्ध समुदाय के लोग हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहो अलेही वसल्लम को पैगंबर मानने की बजाय सिद्धार्थ और बुद्ध को अपना इल्म देने वाला मानते हैं. यह लोग बुद्ध की मूर्ति बनाकर उसकी इबादत करते हैं.

सिख पंथ के लोग गुरु नानक को अपना पैगंबर मानते हैं और ओमकार को अपना खुदा. इन लोगों की तारीख इस्लाम के खिलाफ काफी गंदगी रही है. भारत की तारीख में इस्लाम की सबसे अच्छे बादशाहो ने सिक्खों के कई गुरुओं को काफिराना करने के जुर्म में मौत की सजा दी है. यह लोग भी काफिर हैं.

यहूदी और ईसाई- जब अल्लाह ने हजरत मोहम्मद साहब को अपना पैगंबर बनाकर धरती पर भेजा तमाम आवाम ने पैगंबर की बातों के पर चलना शुरू कर दिया, पर यहूदी और ईसाई जीसस और अब्राहम की बातों पर ही चल रहे हैं. जो अल्लाह ने खुद ही मोहम्मद साहब सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को पैगंबर बनाकर भेजा पूरी होगी और ईसाइयों को भी उन्हीं के अनुसार चलना चाहिए. और यकीन करना चाहिए कि पैगंबर मोहम्मद सल्लल्लाहो अलेही वसल्लम ही आखरी पैगंबर है. जब तक ईसाई और यहूदी इस बात पर ईमान नहीं लाते तब तक वह भी काफिर है.

काफिरों के साथ कैसा सलूक करना चाहिए ?

हिन्दू जैन बौद्ध सिख लोग काफ़िर है, इन काफिरों के साथ कैसा सलूक करना चाहिए, जानिए कुरान में अल्लाह ने क्या कहा है. यहां कुरान की आयतों के हवाले से काफिरों के साथ कैसा सलूक करना है यह बताया जा रहा है तुम मुसलमानों ध्यान देकर पढ़ो, और इसे हकीकत में उतारो.

''फिर, रमजान का महीना) बीत जाऐं, तो 'मुश्रिको' को जहाँ-कहीं पाओ कत्ल करो, और पकड़ो और उन्हें घेरो और हर घातकी जगह उनकी ताक में बैठो। - (कुरान 9:5)

''हे 'ईमान' लाने वालो (केवल एक आल्ला को मानने वालो ) 'मुश्रिक' नापाक (अपवित्र)हैं।'' - (कुरान 9:28)

''निःसंदेह 'काफिर (गैर-मुस्लिम)तुम्हारे खुले दुश्मन हैं।'' (कुरान 4:101).

''हे 'ईमान' लाने वालों! (मुसलमानों) उन 'काफिरों' (गैर-मुस्लिमो) से लड़ो जो तुम्हारे आस पास हैं, और चाहिए कि वे तुम में सखती पायें।'' (कुरान 9:123)

जिन लोगों ने कुरान को मानने से इनकार किया अल्लाह  उनके साथ क्या करेगा

 ''जिन लोगों ने हमारी ''आयतों'' का इन्कार किया (इस्लाम व कुरान को मानने से इंकार) , उन्हें हम जल्द अग्नि में झोंक देंगे। जब उनकी खालें पक जाएंगी तो हम उन्हें दूसरी खालों से बदल देंगे ताकि वे यातना का रसास्वादन कर लें। निःसन्देह अल्लाह प्रभुत्वशाली तत्वदर्शी हैं'' (कुरान 4:56).

वालिद और भाई काफिर बन जाए तो उनके साथ क्या करें

 ''हे 'ईमान' लाने वालों! (मुसलमानों)अपने बापों और भाईयों को अपना मित्रमत बनाओ यदि वे ईमान की अपेक्षा'कुफ्र' (इस्लाम को धोखा) को पसन्द करें। और तुम में से जो कोई उनसे मित्रता का नाता जोड़ेगा, तो ऐसे ही लोग जालिम होंगे, इसलिए उनसे नाता तोड़ दो '' - (कुरान 9:23)

 ''अल्लाह 'काफिर' लोगों (गैर-मुस्लिमो ) को मार्ग नहीं दिखाता'' - (कुरान9:37)

"ऐ ईमान (अल्ला पर यकिन) लानेवालो! तुमसे पहले जिनको किताब दी गई थी, जिन्होंने तुम्हारे धर्म को हँसी-खेल बना लिया है, उन्हें और इनकार करनेवालों को अपना मित्र न बनाओ। और अल्लाह का डर रखों यदि तुम ईमानवाले हो (कुरान5:57)

अल्लाह के सिवा किसी और को पूजने वालो और मूर्तिपूजकों के साथ कैसा सुलूक करें 

 (मुनाफिक) मूर्तिपूजक जहां कही पाए जाऐंगे पकड़े जाएंगे और बुरी तरह कत्ल किए जाएंगे।'' (कुरान 33:61)

 निश्चय ही तुम और वह जिसे तुम अल्लाह के सिवा (दूसरे भगवान को मानना) पूजते थे 'जहन्नम' का ईधन हो। तुम अवश्य उसके घाट उतरोगे।'' - कुरान 21:98

'और उस से बढ़कर जालिम कौन होगा जिसे उसके 'रब' की आयतों के द्वारा चेताया जाये और फिर वह उनसे मुँह फेरले (इस्लाम छोड दे) निश्चय ही हमें ऐसे अपराधियों से बदला लेना है।'' - (कुरान 32:22)

 यहूदियों और ईसाइयों के साथ कैसा सलूक करें

 ''हे 'ईमान' लाने वालों! तुम यहूदियों और ईसाईयों को मित्र संबंध न बनाओ। (कुरान 5:51). 

अल्लाह ने साफ तौर पर मुस्लिमों को बताया है कि काफिरों मुनाफिकों के साथ कैसा बर्ताव करना है. अगर मुसलमान मजबूर है तो कुछ समय के लिए काफिरों को दिखावे के तौर पर अपना दोस्त बना सकता है. लेकिन आखिरी तक अल्लाह के हुक्म की तामील करना जरूरी है वरना मुसलमान होकर भी काफिर की तरह जहन्नम  में जाना पड़ेगा. क्योंकि काफिरों की सिर्फ एक सजा है सजा-ए-मौत. गर सजाये मौत देना मुमकिन न हो तो अल्लाह ने और भी रस्ते बताये हैं काफिरों मुनाफिकों से निपटने के. उन पर अमल लाये.

मुसलमान किसे कहते है और काफ़िर कौन है ? जानिए कुरान से

मुसलमान किसे कहते है और काफ़िर कौन है ? जानिए कुरान से

kafir aur muslim me antar


इतनी बड़ी दुनिया है और इसमें तरह-तरह के मजहब और फिरके हैं जिनके मानने वालों को अलग-अलग नामों से पहचान दी जाती है. जैसे सनातन धर्म के मानने वालों को आर्य और हिंदू, जैन पंथ को मानने वालों को जैनी, बौद्ध पंथ के मानने वालों को बुद्धिस्ट, सिख पंथ के मानने वालों को सिख सरदार और ईसाइयत यानी क्रिश्चियनिटी के मानने वालों को ईसाई और क्रिस्चियन कहते हैं, ठीक इसी तरह अल्लाह और उसके पैगंबर के द्वारा दिए गए इस्लाम के मानने वालों को भी एक नाम दिया गया है यह नाम किसी और ने नहीं दिया बल्कि अल्लाह ने खुद ही दिया है. इस्लाम के मानने वालों को मुस्लिम मोमिन और मुसलमान कहते हैं.

मुसलमान किसे कहते है 

मुसलमान कौन लोग हैं इसका जवाब बहुत ही सीधा= वह लोग जो अल्लाह और उसके नबी की बताई बातों पर यकीन लाते हैं और इस्लाम के मुताबिक चलते हैं. वह मुसलमान है. इस्लाम के पांच बुनियादी खम्भे हैं जिनपर हर मुस्लिम को चलना फर्ज है.

इस्लाम के पांच मूल स्तंभ
  1. शहादा
  2. सलात या नमाज़
  3. सौम या रोज़ा
  4. ज़कात
  5. हज

मुसलमानों का फर्ज है कि वह अल्लाह और मोहम्मद के अलावा किसी पर भी यकीन ना करें. यकीन ना करें कि दुनिया अल्लाह के सिवा कोई और बनाएगा, इस दुनिया को बनाने वाला मुसलमान की मुकद्दर को बनाने वाला सिर्फ और सिर्फ अल्लाह है. एकमात्र आखरी पैगंबर का नाम हजरत मोहम्मद   सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम है. मुसलमान वही है जो अल्लाह और पैगम्बर मुहम्मद के अलावा किसी और को मानने वाले के खिलाफ जंग करे.

काफ़िर कौन लोग है ?

काफिर (अरबी كافر (काफिर); बहुवचन كفّار कुफ्फार) इस्लाम में अरबी भाषा का बहुत विवादित शब्द है जिसका शाब्दिक अर्थ - "अस्वीकार करने वाला" या "ढ़कने वाला" होता है।

मोहम्मद के हवाले से अल्लाह ने कुरान में बताया है कि काफिर वह है जो अल्लाह की इबादत नहीं करता उसके दिए गए इस्लाम को नहीं मानता और इस बात पर यकीन नहीं करता, मानने से इनकार करता है की  हजरत मोहम्मद साहब अल्लाह के आखिरी पैगंबर हैं.

मोहम्मद के हवाले से अल्लाह ने कुरान में बताया है कि काफिर वह है जो अल्लाह की इबादत करने से इनकार करता है उसके दिए गए इस्लाम को नहीं मानता और इस बात पर यकीन नहीं करता हजरत मोहम्मद साहब अल्लाह के आखिरी पैगंबर हैं. 

काफी वो है जो जीसस को खुदा या खुदा का बेटा मानता है. काफ़िर वो है जो बुद्ध को महान मानता है, काफ़िर वो है शिव को भगवान् मानता है, काफ़िर वो है जो बुतपरस्ती करता है. काफ़िर वो है जो गुरु नानक को मानता है. काफ़िर वो है जो यहूदी है, काफ़िर वो है जो हिन्दू है, काफ़िर वो है जो बौद्ध है.  काफ़िर वो है जिसका खुदा अल्लाह नहीं है.

कहने के मायने यह है अल्लाह, पैगंबर मोहम्मद, कुरान और इससे मिलकर बनने वाले इस्लाम के अलावा यदि कोई किसी दूसरे मजहब  खुदा भगवान  और गॉड की इबादत करता है तो वह काफ़िर है. अगर कोई मुसलमान एसा करता है तो वो भी काफ़िर होता जाता है.

काफिरों के साथ असली दोस्ती करना हराम है, काफ़िर मुस्लिमो का दुश्मन है, अल्लाह ने कुरान में काफिरों के साथ अंत तक जंग करने का हुक्म दिया है. 
 इस्लाम क्या है ?

इस्लाम क्या है ?

 

दुनिया बनाने वाले ने कुछ कायदे कानून बनाए थे और दुनिया बनाने वाले खुदा याने अल्लाह ने हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को उन कायदे कानूनों से रूबरू करवाया था. अल्लाह ने किताब के रूप में कायदे कानून हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहो अलेही वसल्लम पर उतारे थे, उसी किताब को कुरान कहते हैं. कुरान में बताए गए उन कायदे कानूनों को अल्लाह का इस्लाम कहते हैं.

कुरान की बताई गई तरीके पर चलने वाली कौम को मुसलमान कहते हैं. मुसलमान भी कई प्रकार के होते हैं जिनके बारे में बाद में आपको रूबरू करवाया जाएगा.

हजरत मोहम्मद साहब कुरेश कबीले में पैदा हुए मुसलमान थे, कुरेश लोगों के ऊपर अल्लाह की नेमत काफी ज्यादा ही रही है.

बुनियादी तौर पर बताया जाए तो इस्लाम कुरान और हदीस के मुताबिक बने कायदे कानून और तौर-तरीकों को कहते हैं. जिन पर चलने वाले  मुसलमान कयामत के बाद जन्नत में दाखिल होंगे और उन कायदे कानूनों पर पर ना चलने वाले लोग जहन्नम में जाएंगे.

भारत का पहला बलात्कारी कौन था ? जानिए भीमराव अंबेडकर द्वारा करुणा यादव संग किये गए दुष्कर्म का इतिहास

भारत का पहला बलात्कारी कौन था ? जानिए भीमराव अंबेडकर द्वारा करुणा यादव संग किये गए दुष्कर्म का इतिहास

आप वर्तमान में ऐसे कई मामले देखते हैं जिनमें अक्सर कुछ ऐसे व्यक्ति राजनीतिक ताकत पाकर बड़े रुतबे वाले हो जाते हैं और अपने बारे में अच्छी-अच्छी बातें प्रचारित करवा लेते हैं तथा अपने कुकर्म और बुरी चीजों को पैसे और रसूख के दम पर छिपा देते है. भीमराव अंबेडकर के मामले में भी ऐसा ही हुआ था.


20 जनवरी 1954 यह वह दिन था जब भीमराव अंबेडकर महाराष्ट्र के भंडारा शहर में चुनाव प्रचार के लिए निकले थे, क्योंकि ये वहीं से लोकसभा के उपचुनाव में उम्मीदवार थे. चुनाव प्रचार के दौरान वह एक यादव परिवार के घर में वोट मांगने गए. वह गरीब यादव परिवार था घर के मुखिया का नाम विवेक यादव था, घर में कुल 5 सदस्य थे. घर का मुखिया विवेक यादव, उसकी मां, उस की पत्नी और उसके दो बच्चे. बच्चों में एक लड़की जो 17 साल की थी और एक 12 साल का लड़का पुष्कर यादव.

विवेक यादव की बेटी पर पड़ी थी आंबेडकर की बुरी नज़र

भीमराव अंबेडकर के पास राजनीतिक समर्थन था उनकी पार्टी एससीएफ को अंग्रेजो (मुख्यतः ए वी अलेक्सेंडर) के द्वारा खूब फंड मिलता था. इसलिए वह जो चाहते थे करते थे.

चुनाव से संबंधित बातें बताने के बाद उन्होंने यादव परिवार से उनकी पार्टी के संबंध में वोट करने की अपील की, इसी बीच विवेक यादव की बेटी करुणा यादव आंगन से गुजरी उस पर भीमराव अंबेडकर की नजर पड़ गई. वोट मांगने के बाद भीमराव अंबेडकर घर से निकल कर आगे बढ़ गए.

पूरा दिन गुजरने के बाद शाम के वक्त अपने कार्यकर्ताओं के साथ भीमराव अंबेडकर फिर से विवेक यादव के दरवाजे पर आ गए. जैसे ही विवेक यादव ने दरवाजा खोला भीमराव अंबेडकर की पार्टी s.c.f. के कार्यकर्ताओं ने विवेक यादव को पकड़ लिया उसे मारा-पीटा और फिर उसे, उसकी माता और विवेक की पत्नी शकुंतला को बांधकर कमरे में बंद कर दिया.

करुना यादव संग बलात्कार

तीनो को कमरे में बंद करने के बाद भीमराव अंबेडकर के कार्यकर्ताओं ने करुणा यादव को पकड़ा और उसे दूसरे कमरे में ले गए, कार्यकर्ता कमरे से बाहर निकल आए और भीमराव अंबेडकर अंदर गए, कमरे से बच्ची की चीख पुकार की आवाजें उसके माता पिता को सुनाई देतीं रहीं. कुछ देर बाद भीमराव अंबेडकर जल्दी से कमरे से बाहर निकल आए और अपने कार्यकर्ताओं समेत विवेक यादव के घर से चले गए.

किसी ने सोचा भी नही था कि जनसेवक का चोला पहनकर घूम रहा ये इंसान अपनी हवस में इतना अंधा हो जाएगा कि किसी को बच्ची का बलात्कार कर डालेगा। पर हमेशा जो सोचो वो नही होता, असिलियत तो यही थी कि भीमराव अंबेडकर ने 17 वर्षीय करुणा यादव का बलात्कार कर डाला था।

लड़की करुणा यादव का छोटा भाई सब देख रहा था

अंबेडकर और उनकी पार्टी एससीएफ के कार्यकर्ता भूल गए थे कि घर में 12 साल का एक लड़का और है. जो इन लोगों के द्वारा उसके पिता विवेक यादव को मारने पीटने से डर गया था, और आंगन में चूल्हे में चलाई जाने वाली लकड़ियों के गट्ठर के ढेर के पास छुप कर बैठ गया था. अंधेरा होने की वजह से कार्यकर्ता उसे देख नहीं पाए.

भीमराव अंबेडकर और उसकी पार्टी s.c.f. के लोगों के जाने के बाद उसने दरवाजा खोला और मम्मी पापा के हाथ को खोल दिया. विवेक यादव ने दूसरे कमरे में जाकर देखा तो उनकी बेटी करुणा यादव क्षत-विक्षत हालत में पड़ी थी, कपड़े फटे हुए थे. करुणा यादव उस यादव परिवार की लाडली बेटी थी. बेसुध हालत में पड़ी अपनी बेटी को देखकर विवेक यादव की पत्नी बहुत जोर जोर से चिल्लाने लगी. रोने की आवाज सुनकर मोहल्ले वाले लोग इकट्ठा हो गए.

सबको लग गयी खबर की आंबेडकर ने बच्ची की अस्मत लूटी

सुबह होते होते यह खबर पूरे इलाके में फैल गई विवेक यादव और उसका परिवार काफी गरीब थे इसलिए वह भीमराव अंबेडकर को सजा नहीं दिलवा सके परंतु भीमराव अंबेडकर के इस दुष्कर्म का असर चुनाव पर पड़ा. भीमराव अंबेडकर चुनाव हार गया किसी ने भी उसे वोट नहीं दिया, इतना ही नहीं उसके बाद वाले सभी चुनाव भीमराव अंबेडकर हारते चले गए.

इस्लाम कबूल करने का आग्रह

अपने अपराध की वजह से भीमराव अंबेडकर को हर जगह बदनामी का सामना करना पड़ा था. इसी बीच कई मुस्लिमों ने उन्हें सलाह दी कि आइए आप इस्लाम को कबूल कर लीजिए और फिर सब सही हो जाएगा. क्योंकि मुसलमान एकजुट होकर के वोट करते हैं इसलिए आप चुनाव में जीत भी जाएंगे.

भीमराव अंबेडकर को पता था कि अभी 1947 यानी कुछ सात साल पहले ही भारत पाकिस्तान बंटवारा हुआ है, जिसमे कट्टरपंथी मुस्लिमों द्वारा अनेकों लोगों की जान ले ली गई है इसलिए हिंदू मुस्लिम दंगे की आग काफी भयंकर रूप में है , बंटवारे में पाकिस्तान में बचे दलित लोगों पर भी मुसलमानों ने भयंकर अत्याचार और कत्लेआम किया था. इसीलिए इस्लाम कबूल करना ठीक नहीं होगा इससे तो और बदनामी होगी. ऊपर से दलित वोट भी चला जाएगा.

दूसरी तरफ भीमराव अंबेडकर को सैद्धांतिक रुप से भी इस्लाम पसंद नहीं था, वो इस्लाम के बहुत कट्टर विरोधी भी थे, उन्होंने अपनी कई पुस्तकों में इस्लाम को आतंक का पंथ तथा मुस्लिमो को देश का बटवारा करवाने का जिम्मेदार माना है. इसीलिए उन्होंने इस्लाम कबूल नहीं किया. 

साफ शब्दों में कहूँ तो अम्बेडकर की मानसिकता ईसाईयों की सरपरस्ती में रहकर ऐसी हो गयी थी कि वो मुसलमानों से नफरत करने लगा था।

बौद्ध धम्म के तले जाना

एक तो वैसे भी भीमराव अंबेडकर जातिवादी राजनीति करते थे जातियों की आपस में लड़ाई करते थे वह भी इतना बड़ा अपराध नहीं माना गया परंतु एक लड़की का रेप करने के बाद हिंदू समाज में भीमराव अंबेडकर का जीना हराम हो गया था. इसलिए मजबूरी वश भीमराव अंबेडकर ने 2 साल बाद 14 अक्टूबर 1956 को बौद्ध धर्म की दीक्षा ले ली. बौद्ध धर्म में दीक्षा लेने का मुद्दा काफी प्रचारित हुआ हर जगह उसकी चर्चा होने लगी और कुछ समय के लिए करुना यादव के बलात्कार का मुद्दा ठंडा पड़ गया, लोग भीमराव आंबेडकर द्वारा किये गए घ्रणित दुष्कर्म को भूल गए.

पीड़ित यादव परिवार रातों रात गायब हुआ, लोगो ने बताया आंबेडकर ने मरवा दिया

इधर भीमराव अंबेडकर ने बौद्ध धर्म की दीक्षा ली, अगले ही महीने वह परिवार जिसकी 17 साल की बच्ची करुणा यादव का भीमराव अंबेडकर ने बलात्कार किया था, वह गरीब परिवार रातों-रात गायब हो गया. गांव वालों का कहना था कि रात को SCF के कुछ लोग आए थे भयंकर मारपीट की और उन्हें अपहरण कर ले गए. 

कई चश्मदीदों ने बताया कि रात को हथियार लेकर कई लोग आए थे इसी वजह से हम लोगों की हिम्मत नहीं हुई, विवेक यादव और उनके परिवार को मार डाला गया और उनकी लाशों को गायब कर दिया गया.

जब विवेक यादव की रिश्तेदारों को पता चला कि विवेक यादव और उसके परिवार की बेरहमी से हत्या कर दी गई है, तो उन्हें समझते देर न लगी कि यह किसने करवाया होगा.

बौद्ध धम्म में जाने के 2 महीने बाद ही गुजर गए आंबेडकर

भीमराव अंबेडकर के ऊपर छींटाकसी और प्रहार होने लगे थे. सब कोई जानता था कि इस व्यक्ति ने क्या-क्या अपराध किए और करवाए हैं.

इन सभी अपराधों का भार लेकर 6 दिसंबर 1956 को भीमराव अंबेडकर की मौत हो गई. यानी कि भीमराव अंबेडकर और उनके अपराधों दोनों का अंत हो गया. बौद्ध धर्म की दीक्षा लेने के 2 महीने बाद ही भीमराव अंबेडकर गुजर गए.