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Friday, October 15, 2021

मोहम्मद साहब का करिश्मा : रसूल अल्लाह के एक इशारे पर जब हुए चाँद के दो टुकड़े

पैगंबर हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की तारीफ कुछ भी कहा जाए वह कम पड़ जाएगा. मोहम्मद साहब पूरी कायनात में सबसे अनोखे इंसान थे जिसे अल्लाह ने नेक मकसद के लिए चुना था. नबी के बारे में तरह-तरह के रोचक किस्से कहानियों का समंदर बना पड़ा है कहानियां कम नहीं होंगी इंसान कम पड़ जाएंगे. ऐसा ही एक ऐसा है जो हजरत मोहम्मद साहब ने बातों बातों में ही चांद के दो टुकड़े कर दिए थे. आइए जानी उस कहानी के बारे में.

चांद के दो टुकड़े करने की करिश्मा की कहानी

Nabi muhammad ne chand ke do tukde kar diye

 जब अल्लाह ने हजरत मोहम्मद को बताया कि मैं तुम्हें अपना पैगाम इंसानों तक पहुंचाने के लिए पैगंबर बनाता हूं. और यह बात जब मोहम्मद साहब ने मक्का शरीफ के लोगों को बताई तो उसमें से अनेकों लोगों ने इस बात पर यकीन करने से इंकार कर दिया. उन्होंने सवालिया निशान लगाते हुए कहा "अगर तुम सच्चे नबी हो तो चांद के दो टुकड़े करके दिखाओ."
लोगों के द्वारा ऐसी बात बोले जाने पर हजरत मोहम्मद साहब मुस्कुराए उन्होंने कहा अगर मैं ऐसा कर देता हूं तब तो तुम यकीन लाओगे ? ऐसा कहकर नबी हजरत मोहम्मद ने आसमान की ओर देखा और अल्लाह को याद किया. अल्लाह ने देखा कि हजरत मोहम्मद साहब की नबूवत को साबित करने के लिए करिश्मा करने की जरूरत है. तो जैसे ही हजरत मोहम्मद साहब ने अल्लाह को याद करके आसमान में दिखाई दे रहे चांद की तरफ ऊँगली की चांद के दो टुकड़े हो गए.

देखने वाले लोगों को अपनी आंखों पर यकीन नहीं हो रहा था, आगे क्या हुआ हदीस की रोशनी से आपको बताते हैं.

बुखारी शरीफ की हदीस नंबर 3637 और मुस्लिम शरीफ की हदीस नंबर 7076 में कहा गया है -

हज़रत अनस रजियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि मक्का शरीफ के कुफ्फार ने रसुल अल्लाह (स.) से सवाल किया कि आप अगर नबी है तो अपनी नबुव्वत की कोई निशानी दिखायें हमें मोजिजा दिखायें ! तो रसुल अल्लाह (स.) ने चांद की तरफ अपनी उंगली से इशारा करके चांद के दो टुकडे कर के दिखाये.

सहीह बुखारी किताब 54 हदीस नंबर 830 इसी किस्से का जिक्र किया गया है-

हज़रत इब्ने मसऊद रजियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसुल अल्लाह (स.) के जमाने में चांद के दो टूकडे हुए एक पहाड के ऊपर था और एक नीचे तो रसुल अल्लाह (स.) ने फरमाया ए लोगों इस पर गवाह रहो.

दोनों हदीसों का मकसद एक ही है यह दोनों एक ही करिश्मा का जिक्र कर रही है. - जब काफिरों ने नबी की नबूवत पर सवाल उठाया और कोई करिश्मा दिखाने को कहा उन नबी ने चाँद की तरफ इशारा करके उसके दो टुकड़े कर दिए . जब रसूल अल्लाह ने चांद के दो टुकड़े किए तो टुकड़े ऐसे हुए, एक टुकड़ा पहाड़ के ऊपर पड़ा था तो दूसरा पहाड़ के नीचे. रसूल अल्लाह ने कुफ्फर की तरफ देखकर कहा - ए लोगो इस बात के गवाह बनो.

Friday, March 12, 2021

जानिए : कुरान की कौन सी 26 आयतों पर पाबन्दी लगवाना चाहते हैं काफ़िर

 वसीम रिजवी ने भारतीय सुप्रीम कोर्ट में कुरान के अंदर से 26 आयतों को निकाल देने की मांग की है. इसके लिए उसने बकायदा जनहित याचिका दायर की है, बड़े-बड़े वकीलों की जमात उसके साथ लगी है जो कोर्ट में यह साबित करेगी कि यह कुरान की आयतें भारत के लोगों यानी मुसलमान और गैर मुसलमान के बीच में लड़ाई झगड़े कराती हैं. या फिर मुसलमानों को यह सिखाती है कि वह चुपके चुपके गैर मुसलमानों के खात्मे की तैयारी करते रहें.

वसीम रिजवी ने कौन से 26 आयतों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका डाली ?

kuran ki kaun si aayton par ban lagane ki mang court me dali gayi

यहां नीचे हम आपको 24 आयतों की लिस्ट दे रहे, हमें अभी तक यह लिस्ट प्राप्त हो सकती है. गौर से पढ़िए इनको अपने मन में तय कीजिए कि वाकई में यह किसी के खिलाफ है.  

1- ''फिर, जब पवित्र महीने (रमजान का महीना) बीत जाऐं, तो 'मुश्रिको' (मूर्तिपूजको ) को जहाँ-कहीं पाओ कत्ल करो, और पकड़ो और उन्हें घेरो और हर घातकी जगह उनकी ताक में बैठो। - (कुरान 9:5 

2- ''हे 'ईमान' लाने वालो (केवल एक आल्ला को मानने वालो ) 'मुश्रिक' (मूर्तिपूजक) नापाक (अपवित्र) हैं।'' - (कुरान 9:28) 

3- ''निःसंदेह 'काफिर (गैर-मुस्लिम)तुम्हारे खुले दुश्मन हैं।'' - (कुरान 4:101).  

4- ''हे 'ईमान' लाने वालों! (मुसलमानों) उन'काफिरों' (गैर-मुस्लिमो) से लड़ो जो तुम्हारे आस पास हैं, और चाहिए कि वे तुम में सखती पायें।'' - (कुरान 9:123) 

5- ''जिन लोगों ने हमारी ''आयतों'' का इन्कार किया (इस्लाम व कुरान को मानने से इंकार) , उन्हें हम जल्द अग्नि में झोंक देंगे। जब उनकी खालें पक जाएंगी तो हम उन्हें दूसरी खालों से बदल देंगे ताकि वे यातना का रसास्वादन कर लें। निःसन्देह अल्लाह प्रभुत्वशाली तत्वदर्शी हैं'' - (कुरान 4:56). 

6- ''हे 'ईमान' लाने वालों! (मुसलमानों) अपने बापों और भाईयों को अपना मित्रमत बनाओ यदि वे ईमान की अपेक्षा 'कुफ्र' (इस्लाम को धोखा) को पसन्द करें। और तुम में से जो कोई उनसे मित्रता का नाता जोड़ेगा, तो ऐसे ही लोग जालिम होंगे'' - (कुरान 9:23) 

7- ''अल्लाह 'काफिर' लोगों (गैर-मुस्लिमो ) को मार्ग नहीं दिखाता'' - (कुरान9:37) 

8- '' ऐ ईमान (अल्ला पर यकिन) लानेवालो! तुमसे पहले जिनको किताब दी गई थी, जिन्होंने तुम्हारे मजहब को हँसी-खेल बना लिया है, उन्हें और इनकार करनेवालों को अपना मित्र न बनाओ। और अल्लाह का डर रखों यदि तुम ईमानवाले हो -  (कुरान 5:57) 

9- ''फिटकारे हुए, (मुनाफिक) मूर्तिपूजक जहां कही पाए जाऐंगे पकड़े जाएंगे और बुरी तरह कत्ल किए जाएंगे।''  (कुरान 33:61) 

10- ''(कहा जाऐगा): निश्चय ही तुम और वह जिसे तुम अल्लाह के सिवा (दूसरे भगवान को मानना) पूजते थे'जहन्नम' का ईधन हो। तुम अवश्य उसके घाट उतरोगे।'' - कुरान 21:98 

11- 'और उस से बढ़कर जालिम कौन होगा जिसे उसके 'रब' की आयतों के द्वारा चेताया जाये और फिर वह उनसे मुँह फेरले (इस्लाम छोड दे) निश्चय ही हमें ऐसे अपराधियों से बदला लेना है।'' - (कुरान 32:22) 

12- 'अल्लाह ने तुमसे बहुत सी 'गनीमतों' (लूट का माल ) में हिस्सा देने का वादा किया है जो तुम्हारे हाथ आयेंगी,'' - (कुरान 48:20) 

13- ''तो जो कुछ गनीमत (लूट का माल और औरते) तुमने हासिल किया है उसे हलाल (valid) व पाक समझकर इस्तेमाल करो  ' - (कुरान 8:69) 

14- ''हे नबी! 'काफिरों' और 'मुनाफिकों' के साथ जिहाद करो (आतंकवादी बनकर गैर-मुस्लिमो का कत्ल) और उन पर सखती करो और उनका ठिकाना 'जहन्नम' है, और बुरी जगह है जहाँ पहुँचे'' -  (कुरान 66:9) 

15- 'तो अवश्य हम 'कुफ्र' (इस्लाम को धोखा देने वालो) करने वालों को यातना का मजा चखायेंगे, और अवश्य ही हम उन्हें सबसे बुरा बदला देंगे उस कर्म का जो वे करते थे।'' - (कुरान41:27) 

16- ''यह बदला है अल्लाह के शत्रुओं का('जहन्नम' की) आग (गैर-मुस्लिमो को नर्क )। इसी में उनका सदा का घर है, इसके बदले में कि हमारी'आयतों' का इन्कार(इस्लाम व कुरान को नही अपनाना) करते थे।'' - (कुरान 41:28) 

17- ''निःसंदेह अल्लाह ने'ईमानवालों' (मुसलमानों) से उनके प्राणों और उनके मालों को इसके बदले में खरीद लिया है कि उनके लिए 'जन्नत' हैः वेअल्लाह के मार्ग में लड़ते हैं तो मारते भी हैं (इस्लाम फैलाने के लिये आतंकवादी बन कर गैर-मुस्लिमो को मारना व जबरन इस्लाम कबूलवाना) और मारे भी जाते हैं।'' - (कुरान 9:111). 

18- ''अल्लाह ने इन 'मुनाफिक' पुरुषों और मुनाफिक स्त्रियों और काफिरों से 'जहन्नम' की आग का वादा किया है जिसमें वे सदा रहेंगे। यही उन्हें बस है।अल्लाह ने उन्हें लानत की और उनके लिए स्थायी यातना है। (गैर-मुस्लिम सदा नर्क मे रहेगे )'' - (कुरान 9:68) 

19- ''हे नबी! 'ईमानवालों' (मुसलमानों) कोलड़ाई पर उभारो। यदि तुम में बीस जमेरहने वाले होंगे तो वे दो सौ पर प्रभुत्वप्राप्त करेंगे, और यदि तुम में सौ हो तो एक हजार काफिरों (गैर-मुसलमानो) पर भारी रहेंगे' - (कुरान 8:65) 

20- ''हे 'ईमान' लाने वालों! तुम यहूदियों और ईसाईयों को मित्र संबंध न बनाओ। - (कुरान 5:51).  

21- उनसे लड़ो यहाँ तक कि वे जलील होकर अपने हाथों से 'जजिया' देने लगे।'' (गैर-मुसलिमो पर जजिया tax) - (कुरान 9:29) 

22-फिर हमने उनके बीच कियामत के दिनतक के लिये वैमनस्य और द्वेष की आग भड़का दी, और अल्लाह जल्द उन्हें बतादेगा जो कुछ वे करते रहे हैं। - (कुरान 5:14) 

23- ''वे चाहते हैं कि जिस तरह से वे काफिर (गैर-मुस्लिम) हुए हैं उसी तरह से तुम भी 'काफिर' हो जाओ, फिर तुम एक जैसे हो जाओः इसीलिए उनमें से किसी को अपना साथी न बनाना जब तक वे अल्लाह की राह में हिजरत न करें, और यदि वे इससे फिर जावें तो उन्हें जहाँ कहीं पाओं पकड़ों और उनका कत्ल करो।और उनमें से किसी को साथी और सहायक मत बनाना।'' - (कुरान 4:89) 

24- ''उन (काफिरों) गैर-मुस्लिमो से लड़ों! अल्लाहतुम्हारे हाथों उन्हें यातना देगा, और उन्हें रुसवा करेगा और उनके मुकाबले में तुम्हारी सहायता करेगा, और 'ईमान' वालोंलोगों के दिल ठंडे करेगा'' - (कुरान 9:14). 

संक्षेप

अभी हमें 24 आयतों के बारे में ही जानकारी उपलब्ध हो सकी है. कुरान की वर्सेस पर पहली बार कोई मुकदमा नहीं डाला गया है पहले भी कई बार एसा हो चूका है. फिक्र ना करें ना पहले कुछ हुआ है ना अब कुछ हो पाएगा.  

Wednesday, March 10, 2021

इस्लाम क्या है ?

 

दुनिया बनाने वाले ने कुछ कायदे कानून बनाए थे और दुनिया बनाने वाले खुदा याने अल्लाह ने हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को उन कायदे कानूनों से रूबरू करवाया था. अल्लाह ने किताब के रूप में कायदे कानून हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहो अलेही वसल्लम पर उतारे थे, उसी किताब को कुरान कहते हैं. कुरान में बताए गए उन कायदे कानूनों को अल्लाह का इस्लाम कहते हैं.

कुरान की बताई गई तरीके पर चलने वाली कौम को मुसलमान कहते हैं. मुसलमान भी कई प्रकार के होते हैं जिनके बारे में बाद में आपको रूबरू करवाया जाएगा.

हजरत मोहम्मद साहब कुरेश कबीले में पैदा हुए मुसलमान थे, कुरेश लोगों के ऊपर अल्लाह की नेमत काफी ज्यादा ही रही है.

बुनियादी तौर पर बताया जाए तो इस्लाम कुरान और हदीस के मुताबिक बने कायदे कानून और तौर-तरीकों को कहते हैं. जिन पर चलने वाले  मुसलमान कयामत के बाद जन्नत में दाखिल होंगे और उन कायदे कानूनों पर पर ना चलने वाले लोग जहन्नम में जाएंगे.